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उज्जैन में खड़े हनुमान का 'चमत्कार'! तीन बार कोशिश के बाद भी नहीं हिली प्रतिमा... अब संत समाज आया आगे

करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर को नए स्थान पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया प्रशासन द्वारा की जा रही है. इसी बीच हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु बजरंगबली के दर्शन के लिए मंदिर आ रहे हैं. हालात ये हैं कि सुबह से रात तक यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. बीते कुछ दिनों में इंजीनियर और विशेषज्ञों की टीम भी यहां का मुआयना कर चुकी है, लेकिन हनुमान जी की प्रतिमा का टस से मस नहीं किया जा सका.

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प्रसिद्ध खड़े हनुमान प्रतिमा के विस्थापन पर छिड़ा है संग्राम प्रसिद्ध खड़े हनुमान प्रतिमा के विस्थापन पर छिड़ा है संग्राम

उज्जैन में करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की चर्चा के बीच संत समाज और कांग्रेस खुलकर इसके विरोध में उतर आए हैं. प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रतिमा हटाने को लेकर चल रही कई खबरें भ्रामक हैं और सभी पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लिया जाएगा.

तीन बार प्रयास के बाद भी नहीं हिली प्रतिमा
सिंहस्थ महापर्व को देखते हुए उज्जैन में आंतरिक सड़कों के चौड़ीकरण का काम चल रहा है. इसी के तहत कंठाल चौक से छत्री चौक तक का मार्ग चौड़ा किया जा रहा है. इस रास्ते में आने वाले कुछ धार्मिक स्थलों को हटाया जा चुका है, लेकिन करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है. प्रशासन और विशेषज्ञों की टीम मंदिर का निरीक्षण कर चुकी है. बताया जा रहा है कि प्रतिमा को हटाने के लिए तीन बार प्रयास किए गए, लेकिन वह अपनी जगह से नहीं हिली. स्थानीय लोग इसे हनुमानजी का चमत्कार मान रहे हैं. पुरातत्व विभाग भी प्रतिमा के करीब 1000 साल पुरानी होने की संभावना को लेकर जांच कर रहा है.

संत समाज ने जताया विरोध
बुधवार को उज्जैन का संत समाज खड़े हनुमान मंदिर पहुंचा. संतों ने हनुमानजी के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा की और प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने का विरोध किया. श्रीराम जन्मभूमि के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के शिष्य महंत राघवेंद्र दास महाराज ने कहा कि भगवान को बार-बार उठाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि हनुमानजी तीन बार अपना चमत्कार दिखा चुके हैं और शासन-प्रशासन को बाबा को उसी स्थान पर रहने देना चाहिए.

महा निर्मोही अखाड़े के गादीपति महंत विनीत गिरी महाराज ने कहा कि प्रशासन को जनभावनाओं का सम्मान करना चाहिए. संवाद के जरिए इस समस्या का समाधान निकाला जाना चाहिए. विकास की नींव विनाश पर नहीं रखी जानी चाहिए.

कांग्रेस ने भी खोला मोर्चा
बुधवार दोपहर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी प्रतिमा हटाने की योजना के विरोध में प्रदर्शन किया. विधायक महेश परमार, पूर्व विधायक दिलीप सिंह गुर्जर और शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी समेत सैकड़ों कार्यकर्ता भगवा ध्वज लेकर रामधुन गाते हुए मंदिर पहुंचे. यहां उन्होंने हनुमानजी का पूजन और हनुमान चालीसा का पाठ किया.

तंबू में विराजमान हैं हनुमान जी
मंदिर की बाहरी दीवार गिराए जाने के बाद से खड़े हनुमान जी फिलहाल तंबू में विराजमान हैं. बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुबह से रात तक दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि यहां हनुमानजी के दर्शन और पूजा से कई लोगों को लाभ मिला है.

प्रशासन ने कहा- नहीं हटाई जाएगी प्रतिमा जल्दबाजी में
सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के बीच जिला प्रशासन ने बुधवार को स्पष्टीकरण जारी किया. प्रशासन ने कहा कि खड़े हनुमानजी का विषय उज्जैन वासियों और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है. सभी संबंधित पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना कोई फैसला नहीं लिया जाएगा. प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक प्रतिमा को हटाने या विस्थापित करने के लिए किसी मशीन या मानवीय तरीके से कोई प्रयास नहीं किया गया है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस आस्था और विकास से जुड़े मामले का समाधान किस तरह निकालता है.

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