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मन्नत पूरी हुई तो भक्त ने नहीं देखा खर्च, मंगलनाथ को चढ़ा दी 20 किलो चांदी, बदला शिवलिंग का स्वरूप

अतिप्राचीन मंगलनाथ मंदिर में हर दिन हजारों श्रद्धालु भगवान मंगलनाथ के दर्शन एवं पूजन के लिए आते हैं. इनमें कई ऐसे भक्त हैं, जो मनोरथ पूर्ण होने पर भगवान के मंदिर में दिल खोलकर दान देते हैं.

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Mangalnath Temple Mangalnath Temple

यूं तो उज्जैन के कण-कण में शंकर का वास हैं. यहां कई ऐसे मंदिर हैं, जो अपना पौराणिक महत्व रखते हैं. इन्हीं में से एक है अतिप्राचीन मंगलनाथ मंदिर. जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु भगवान मंगलनाथ के दर्शन एवं पूजन के लिए आते हैं. इनमें कई ऐसे भक्त हैं, जो मनोरथ पूर्ण होने पर भगवान के मंदिर में दिल खोलकर दान देते हैं. ऐसे ही हैदराबाद के श्रद्धालु अमर ओहरी व सोनल ओहरी ने भगवान मंगलनाथ को करीब 20 किलो चांदी से निर्मित जलधारी दान स्वरूप अर्पित की. जिसकी अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपए बताई जा रही है. श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित की गई जलाधारी को शिवलिंग पर लगा दिया गया है. इसके लिए मंदिर में करीब सात घंटे दर्शन व्यवस्था भी बंद रखी गई थी.

दरअसल, इसके पहले यहां जो जलाधारी लगी हुई थी वो करीब 20 वर्ष पुरानी हो गई थी, रोजाना पूजन के कारण पतली हो चुकी थी, जिस वजह से सेवा करने में जलाधारी से श्रद्धालुओं को चोट लगने का खतरा बना रहता था. जिसे लेकर मंदिर से जुड़े पंडित अजय भारती ने हैदराबाद निवासी अमर ओहरी से चर्चा की और उनकी प्रेरणा से धर्मालु ने भगवान मंगलनाथ को चांदी की नई जलधारी अर्पित की. जलधारी का वजन लगभग 20 किलो है. गुरुवार को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन कर जलाधारी को बदला गया. अब भगवान मंगलनाथ नई चांदी की जलाधारी धारण कर भक्तों को दर्शन दे रहे हैं.

कर्क रेखा के मध्य में विराजित
मंदिर के पुजारी ने बताया कि पुरानी जलाधारी से निकली चांदी से भगवान का नाग और कलश पात्र बनाया जाएगा. मंदिर के प्रबंधक ने बताया कि जलाधारी के अलावा मंदिर में लाई गई नई प्रतिमाओं की भी प्राण प्रतिष्ठा का कार्य किया गया है. इसके लिए 11 बजे से शाम 6 बजे तक मंदिर में श्रद्धालुओं का प्रवेश पूरी तरह से बंद किया गया था. जलाधारी लगने के बाद संध्या में विधि-विधान से पूजा अर्चना किया गया. हैदराबाद के ओहरी परिवार द्वारा दी गई श्रद्धापूर्ण भेंट से भगवान मंगलनाथ का दरबार और अधिक भव्य हो गया है. नई जलाधारी में विराजित भगवान मंगलनाथ के दर्शन कर श्रद्धालु स्वयं को धन्य कर रहे हैं.

आपको बता दें कि, मंगलनाथ के इस मंदिर को भगवान मंगल का जन्म स्थान माना गया है. ऐसा कहा जाता है कि भगवान महामंगल का विद्यव का ये एकमात्र मंदिर है, जो कर्क रेखा के मध्य में विराजित है. भगवान यहां शिव रूप में विराजमान हैं. मंदिर में भात पूजा का विशेष महत्व होने से दूर दूर से श्रद्धालु यहां भात पूजन के लिए आते हैं, ऐसा माना जाता है कि पूजा से भक्तों की राशि के मंगल दोषों का निवारण होता है.

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