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अंकोरवाट मंदिर की तर्ज पर तैयार हो रहा भव्य पूजा पंडाल, काशी में दिखेगी दुनिया के सबसे बड़े मंदिर की झलक

वाराणसी में हथुआ मार्केट के पूजा पंडाल में दुनिया के सबसे बड़े मंदिर कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर की झलक दिखाई देगी. इस वर्ष दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं को कंबोडिया के विश्वविख्यात अंकोर वाट मंदिर की स्थापत्य कला की झलक देखने को मिलेगी. अंकोरवाट मंदिर की तर्ज पर भव्य पूजा पंडाल तैयार किया जा रहा है.

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Varanasi Durga Puja Varanasi Durga Puja

बंगाल की तर्ज पर काशी में दुर्गा पूजा भव्य रूप से मनाया जाता है. पूजा पंडाल की भव्यता, दिव्यता एवं सुंदरता बनाने के लिए देश के विभिन्न मंदिरों के पंडाल के रूप में सजाया जाता है. जिससे नवरात्रि में दुर्गा पूजा पंडाल का आकर्षण लोगों को देखने के लिए मजबूर करता है. वाराणसी में लाखों लोग सड़कों पर निकाल कर दुर्गा पूजा पंडाल देखने के लिए पहुंचते हैं. इस बार पूर्वांचल की प्रसिद्ध दुर्गा पूजा समिति गोल्डन बॉयज स्पोर्टिंग क्लब ने हथुआ मार्केट में विश्व की सबसे बड़ी मंदिर 8,20,000 वर्ग मीटर में फैला कंबोडिया के विश्व विख्यात अंकोरवाट मंदिर स्थापित किया गया है, जो भारत के अक्षर धाम मंदिर से 4 गुना बड़ा है.

दुर्गा पंडाल में अंकोरवाट मंदिर की झलक-
धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में इस वर्ष दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं को कंबोडिया के विश्वविख्यात अंकोर वाट मंदिर की स्थापत्य कला की झलक देखने को मिलेगी. हथुआ मार्केट में अंकोरवाट मंदिर की तर्ज पर भव्य पूजा पंडाल तैयार किया जा रहा है. अपनी आकर्षक बनावट और अनूठी वास्तुकला के जरिए यह पंडाल दुर्गा पूजा के प्रमुख आकर्षण हैं. यह विश्व का सबसे बड़ा मंदिर है.

12वीं शताब्दी में हुआ था अंकोरवाट मंदिर का निर्माण-
कंबोडिया के सिएम रीप क्षेत्र में स्थित अंकोरवाट मंदिर दुनिया के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल है. इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में खमेर साम्राज्य के राजा सूर्यवर्मन द्वितीय के शासनकाल में कराया गया था. मूल रूप से भगवान विष्णु को समर्पित इस मंदिर में बाद के समय में बौद्ध धर्म का भी व्यापक प्रभाव देखने को मिला.

दुनिया में फेमस है मंदिर-
अंकोरवाट अपनी विशाल संरचना, ऊंचे शिखरों, विस्तृत परिसर और बारीक पत्थर की नक्काशी के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है. मंदिर के पांच प्रमुख शिखर हिंदू मान्यताओं के अनुसार सुमेरु पर्वत का प्रतीक माने जाते हैं. इसकी वास्तुकला प्राचीन खमेर सभ्यता की उन्नत शिल्पकला और धार्मिक परंपराओं का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है.

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