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कुंडली में मंगल है अशुभ? जानें अंगारक योग, मंगल दोष और नीच के मंगल के असर... क्या हैं इनके उपाय?

मंगल अशुभ ग्रहों के प्रभाव में आकर कमजोर स्थिती में चला जाता है. ऐसे में व्यक्ति की कुंडली में कई अशुभ योग बन जाते हैं, जो कई तरह की परेशानियों को पैदा कर सकते हैं. जानें कैसे आप इन अशुभ योग को दूर कर सकते हैं?

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मंगल के अशुभ योग मंगल के अशुभ योग

ज्योतिष में मंगल को साहस, ऊर्जा, जमीन-जायदाद, सुरक्षा और आत्मविश्वास का ग्रह माना जाता है. कुंडली में मंगल मजबूत हो तो व्यक्ति में जोश और निर्णय लेने की क्षमता अच्छी मानी जाती है. वहीं, जब मंगल पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव हो या वह कमजोर स्थिति में हो, तो ज्योतिष के अनुसार कुछ परेशानियां बढ़ सकती हैं. इसे मंगल के अशुभ योगों से जोड़कर देखा जाता है. क्या होते हैं मंगल के अशुभ योग और क्या हैं ठीक करने के उपाय?

अंगारक योग क्या होता है?

ज्योतिष के अनुसार कुंडली में मंगल और राहु एक साथ हों तो अंगारक योग बनता है. इसे मंगल के प्रभाव को बढ़ाने वाला योग माना जाता है. इसके कारण व्यक्ति के स्वभाव में गुस्सा और जल्दबाजी बढ़ सकती है. दुर्घटना, चोट और रक्त संबंधी परेशानी की आशंका भी बताई जाती है. पारिवारिक और वैवाहिक रिश्तों में तनाव की स्थिति बन सकती है.

इस योग के लिए मंगलवार का व्रत रखना और भगवान कार्तिकेय की पूजा करना शुभ माना जाता है. हालांकि, किसी भी उपाय को कुंडली की पूरी स्थिति देखकर ही करना बेहतर माना जाता है.

मंगल दोष क्या है?

कुंडली में मंगल के लग्न, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में होने को ज्योतिष में मंगल दोष कहा जाता है. खासकर विवाह के मामले में इसे महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसी स्थिति में कुंडली मिलान की सलाह दी जाती है, ताकि दोनों की कुंडली में मंगल की स्थिति को समझा जा सके.

यदि मंगल दोष के कारण परेशानी मानी जा रही हो तो हनुमान जी की पूजा करना और नियमित रूप से चोला चढ़ाना शुभ माना जाता है. भूमि से जुड़े कार्यों और जमीन के पास सोने को भी कुछ ज्योतिषीय उपायों में शामिल किया जाता है.

नीच का मंगल क्या होता है?

मंगल कर्क राशि में नीच का माना जाता है. ज्योतिष के अनुसार ऐसी स्थिति में आत्मविश्वास, साहस और ऊर्जा में कमी महसूस हो सकती है. हालांकि, कुछ स्थितियों में कर्क राशि का मंगल व्यक्ति को चिकित्सा या सर्जरी जैसे क्षेत्रों में सफलता भी दे सकता है.

नीच के मंगल के लिए तांबा धारण करना तथा गुड़ और काली मिर्च का सेवन करना ज्योतिष में बताए गए उपायों में शामिल है.

शनि-मंगल का संबंध और प्रभाव

ज्योतिष में शनि को वायु और मंगल को अग्नि का कारक माना जाता है. इसलिए दोनों का संबंध होने पर जीवन में तनाव, संघर्ष और अचानक होने वाली घटनाओं की संभावना बताई जाती है. दूसरी ओर, यह योग व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से लड़ने और बड़ी सफलता पाने की क्षमता भी दे सकता है.

ऐसी स्थिति में रोज माता-पिता के चरण स्पर्श करना और मंगलवार व शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करना शुभ माना जाता है.