Lord Vishnu
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आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है. इस एकादशी से अगले चार माह तक श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं. ऐसे में अगले चार माह तक शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं. इसी समय से चातुर्मास की शुरुआत भी हो जाती है. इस एकादशी से तपस्वियों का भ्रमण भी बंद हो जाता है. इन दिनों में केवल ब्रज की यात्रा की जा सकती है. इस बार देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को है. पद्म पुराण और भविष्योत्तर पुराण में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से व्रत और पूजा करने पर अनेक यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है. भगवान श्रीकृष्ण ने भी धर्मराज युधिष्ठिर को इस व्रत का महत्व बताते हुए इसे मोक्षदायी बताया है.
क्या वास्तव में देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु सो जाते हैं?
हरि और देव का अर्थ तेज तत्व से भी है. इस समय में सूर्य चन्द्रमा और प्रकृति का तेज कम होता जाता है. इसीलिए कहा जाता है कि देव शयन हो गया है. तेज तत्व या शुभ शक्तियों के कमजोर होने पर किए गए कार्यों के परिणाम शुभ नहीं होते. इसके अलावा कार्यों में बाधा आने की सम्भावना भी होती है. इसलिए देवशयनी एकादशी से अगले चार माह तक शुभ कार्य करने की मनाही होती है.
देवशयनी एकादशी पर क्या-क्या मिल सकते हैं वरदान?
सामूहिक पापों और समस्याओं का नाश होता है. व्यक्ति का मन शुद्ध होता है. दुर्घटनाओं के योग टल जाते हैं. इस एकादशी के बाद से शरीर और मन को नवीन किया जा सकता है.
देवशयनी एकादशी के लिए पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त 25 जुलाई को सुबह 05 बजकर 06 मिनट से सुबह 05 बजकर 40 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा अन्य पूजन के मुहूर्त भी हैं. अमृत काल शाम 06:11 बजे से रात 07:59 बजे तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 01:26 बजे से दोपहर 02:28 बजे तक, गोधूलि मुहूर्त रात 09:39 बजे से रात 09:56 बजे तक और विजय मुहूर्त शाम 04:31 बजे से शाम 05:32 बजे तक रहेगा. देवशयनी एकादशी का पारण समय 26 जुलाई 2026 को सुबह 5 बजकर 39 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 22 मिनट तक रहेगा.
देवशयनी एकादशी पर कैसे करें पूजा उपासना?
रात्रि को विशेष विधि विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें. उन्हें पीली वस्तुएं, विशेषकर पीला वस्त्र अर्पित करें. इसके बाद उनके मंत्रों का जप करें. आरती उतारें. आरती के बाद सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जमत्सुप्तं भवेदिदम्। विबुद्धे त्वयि बुद्धं च जगत्सर्व चराचरम्।। मंत्र से भगवान विष्णु की प्रार्थना करें. प्रार्थना के बाद भगवान से करुणा करने के लिए कहें.