AI Generated Image
AI Generated Image
करवा चौथ का त्योहार शादीशुदा महिलाओं के लिए बेहद खास होता है. इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल शादीशुदा जीवन के लिए व्रत रखती हैं.
वह शाम को भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा की जाती है. इसके बाद रात में चांद को जल चढ़ाकर व्रत खोला जाता है. करवा चौथ की पूजा में करवे का खास महत्व होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूजा में मिट्टी, स्टील या लोहे में से किस करवे का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है?
पूजा में करवा क्यों जरूरी है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा माता का प्रतीक माना जाता है. पूजा के दौरान महिलाएं करवे में पानी भरकर रखती हैं. रात में चांद निकलने के बाद इसी पानी से चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. इसके बाद महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं. यही वजह है कि करवा चौथ की पूजा में करवे को खास जगह दी जाती है.
मिट्टी का करवा क्यों माना जाता है शुभ?
करवा चौथ पर मिट्टी का करवा इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मिट्टी धरती का प्रतीक है और पानी जीवन का प्रतीक माना जाता है. मिट्टी के करवे में पानी भरकर पूजा करना प्रकृति से जुड़ाव को दिखाता है. यही कारण है कि पुराने समय से करवा चौथ की पूजा में मिट्टी के करवे का इस्तेमाल किया जाता रहा है.
क्या स्टील या लोहे का करवा इस्तेमाल करना चाहिए?
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ की पूजा में लोहे और प्लास्टिक के करवे का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. लोहे और कुछ धातुओं को शनिदेव से संबंधित माना जाता है, जबकि प्लास्टिक को राहु-केतु सहित अशुभ ग्रहों से जोड़कर देखा जाता है. माना जाता है कि पूजा में पारंपरिक मिट्टी का करवा इस्तेमाल करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है.
करवा बदलने की परंपरा क्या है?
देश के कुछ हिस्सों में करवा चौथ की पूजा के दौरान दो करवे रखे जाते हैं. एक करवा पूजा के लिए होता है, जबकि दूसरे का इस्तेमाल करवा बदलने की रस्म में किया जाता है. पूजा के बाद महिलाएं आपस में करवे बदलती हैं. इसके बाद सास या घर की बड़ी महिलाओं को करवा देकर उनका आशीर्वाद लेती हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से शादीशुदा जीवन में सुख और खुशहाली बनी रहती है.