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Dusshera 2026: कौन है मां अपराजिता? जिनकी भगवान राम ने की पूजा... जिसके बाद हुआ था रावण का वध

दशहरा के दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था. लेकिन रावण से युद्ध करने से पहले भगवान राम ने देवी अपराजिता की पूजा भी की थी? क्या आप इसके पीछे की वजह जानते हैं?

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दशहरा का त्योहार बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत के तौर पर देखा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रावण से युद्ध करने से पहले भगवान राम ने देवी अपराजिता की पूजा भी की थी? इस पूजा का संबंध विजय और शक्ति से माना जाता है. चलिए बताते हैं कि मां अपराजिता कौन हैं, भगवान राम ने उनकी पूजा क्यों की और दशहरे पर उनकी पूजा कैसे की जाती है. 

कौन हैं मां अपराजिता?

हिंदू धर्म में मां अपराजिता को शक्ति और विजय का प्रतीक माना जाता है. अपराजिता शब्द का अर्थ है ऐसी शक्ति जिसे हराया न जा सके. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी अपराजिता को मां दुर्गा या देवी वैष्णवी का स्वरूप माना जाता है. विजयदशमी के दिन उनकी पूजा करना शुभ माना जाता है. भक्त इस दिन देवी से जीवन में सफलता, सुख और समृद्धि की कामना करते हैं. 

रावण से युद्ध से पहले भगवान राम ने क्यों की पूजा?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण से युद्ध करने से पहले मां अपराजिता की आराधना की थी. भगवान राम का उद्देश्य रावण पर विजय प्राप्त करना और अधर्म का अंत करना था. मान्यता है कि देवी की पूजा से उन्हें विजय का आशीर्वाद मिला. इसके बाद भगवान राम ने युद्ध में रावण का वध किया. इसी कारण दशहरे पर मां अपराजिता की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है.  

दशहरे पर कैसे करें मां अपराजिता की पूजा?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, दशहरे के दिन दोपहर के बाद मां अपराजिता की पूजा करना शुभ माना जाता है. पूजा के लिए सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और सूर्य देव को जल अर्पित करें. इसके बाद एक साफ जगह पर देवी की तस्वीर या मूर्ति रखें. मां को रोली, चावल और फूल चढ़ाएं. फिर देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और अपनी मनोकामना कहें. अंत में देवी को भोग लगाकर प्रसाद बांटें. पूजा करते समय मन में श्रद्धा और विश्वास रखें. 

मां अपराजिता की पूजा का क्या है महत्व?

मान्यता है कि विजयदशमी पर मां अपराजिता की पूजा करने से जीवन की परेशानियों को दूर करने और काम में सफलता पाने का आशीर्वाद मिलता है. भक्त इस दिन देवी से साहस, शक्ति और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं. दशहरे का यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्चाई और धर्म के रास्ते पर चलकर बुराई का सामना करना चाहिए.