Bhog
Bhog
सनातन धर्म में पूजा के समय भोग लगाने की परंपरा काफी पुरानी है. लगभग हर घर और मंदिर में पूजा के बाद भगवान को भोजन, फल, मिठाई या अन्य सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है. इसके बाद यही भोग प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है.
कई लोगों के मन में सवाल आता है कि जब भगवान को किसी चीज की जरूरत नहीं है, तो फिर उन्हें भोग क्यों लगाया जाता है. इसका जवाब दरअसल धार्मिक मान्यताओं और आस्था में छिपा है. भोग लगाना भगवान के प्रति प्रेम, विश्वास और धन्यवाद प्रकट करने का एक तरीका माना जाता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हमारे पास जो भी अन्न, धन और सुख है, वह केवल भगवान की कृपा से ही हमको मिलता है. इसलिए भोजन करने से पहले उसका एक भाग भगवान को अर्पित किया जाता है. यह इस बात का इशारा है कि हम अपने जीवन में ईश्वर के योगदान को स्वीकार करते हैं और उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं. माना जाता है कि भगवान भोजन नहीं बल्कि भक्त की भावना को स्वीकार करता हैं.
जब भोजन भगवान को अर्पित किया जाता है, तो उसे प्रसाद कहा जाता है. धार्मिक विश्वास है कि जब भोग लगाया जाता है तो भगवान का आशीर्वाद उसे मिलता है, जिससे वह पवित्र बन जाता है. इसके बाद उस प्रसाद को परिवार और अन्य लोगों में बांटा जाता है. यह परंपरा प्रेम, समानता और मिलकर रहने का संदेश भी देती है.
भोग हमेशा साफ और सात्विक भोजन होना चाहिए. भोजन बनाते समय स्वच्छता का ध्यान रखें और मन में अच्छे विचार रखें. भोग लगाने से पहले भगवान के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाकर श्रद्धा से प्रार्थना भी करें. कुछ समय तक भोजन को भगवान के सामने रखें फिर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें. कई बार लोग भोग में तुलसी का पत्ता भी रखते हैं, खासकर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में.