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Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी को कलंक चतुर्थी भी क्यों कहा जाता है? क्या है चांद और गणेश जी के बीच में ऐसा रिश्ता?

आज गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा. क्या आप जानते हैं कि इस दिन चंद्रमा को देखना शुभ नहीं माना जाता है? धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की रात चंद्रमा के दर्शन करने से व्यक्ति पर झूठा आरोप लग सकता है.

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Ganesh Chaturthi 2026 Ganesh Chaturthi 2026

आज गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा. इस दिन घरों और पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना की जाती है. भक्त गणपति बप्पा की पूजा करते हैं और उनसे सुख, शांति और सफलता की प्रार्थना करते हैं. लेकिन गणेश चतुर्थी से जुड़ी एक ऐसी मान्यता भी है, जिसके बारे शायद कई लोगों को पता नहीं होगा. 

दरअसल गणेश चतुर्थी के दिन चांद देखने से बचने की सलाह दी जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर चांद देखने से व्यक्ति पर झूठा आरोप लग सकता है और उसे बदनामी का सामना करना पड़ सकता है. इसे चंद्र दर्शन दोष कहा जाता है. इसलिए गणेश चतुर्थी को 'कलंक चतुर्थी' भी कहा जाता है.

गणेश चतुर्थी पर चांद क्यों नहीं देखना चाहिए?

पौराणिक कथा के अनुसार, चंद्र देव को अपनी सुंदरता पर बहुत घमंड था. एक बार उन्होंने भगवान गणेश के रूप का मजाक उड़ाया. इससे गणेश जी नाराज हो गए. उन्होंने चंद्रमा को श्राप दिया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन जो भी व्यक्ति चंद्रमा को देखेगा, उस पर झूठा आरोप लग सकता है और उसे अपयश मिल सकता है.

बाद में चंद्र देव को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान गणेश से माफी मांगी. इसके बाद गणेश जी ने अपने श्राप का असर सीमित कर दिया. तभी से गणेश चतुर्थी के दिन चांद देखने को लेकर सावधानी बरतने की परंपरा चली आ रही है.

भगवान कृष्ण से भी जुड़ी है यह कथा

चंद्र दर्शन दोष का संबंध भगवान कृष्ण की एक कथा से भी बताया जाता है. मान्यता है कि भगवान कृष्ण पर स्यमंतक मणि चोरी करने का झूठा आरोप लगा था. खुद को निर्दोष साबित करने के लिए उन्होंने मणि की खोज की. बाद में उन्हें सच्चाई का पता चला और मणि मिल गई. इस तरह भगवान कृष्ण झूठे आरोप से मुक्त हुए.

गलती से चांद दिख जाए तो क्या करें?

मान्यता के अनुसार, अगर गणेश चतुर्थी के दिन गलती से चांद दिखाई दे जाए तो भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए. गणपति जी को मोदक और धूप अर्पित करें और उनसे झूठे आरोप तथा बदनामी से बचाने की प्रार्थना करें. इस दौरान 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप भी किया जा सकता है.