श्रीमद् भगवद गीता के उपदेशों में जीवन का सच्चा सार छिपा है. गीता की पहली शिक्षा यह है कि भीड़ किसके साथ है, यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि विजय उसी की होती है जिसके साथ ईश्वर होते हैं. दूसरी अहम शिक्षा कर्मों के फल से जुड़ी है. इंसान जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही परिणाम भुगतना पड़ता है, इसलिए बिना विचारे कोई काम नहीं करना चाहिए. तीसरी शिक्षा मृत्यु के भय से मुक्ति के बारे में है. मृत्यु एक शाश्वत सत्य है, इसलिए इंसान को मौत से नहीं, बल्कि मौत के डर से बचना चाहिए. जीवन ऐसा होना चाहिए कि मृत्यु भी गर्व करे. चौथी शिक्षा यह है कि मनुष्य को रोगी या भोगी बनने के बजाय कर्मयोगी बनना चाहिए. जीवन में मिलने वाली ठोकरें इंसान को मजबूत और महान बनाती हैं. इसलिए बिना डरे निरंतर अपने कर्म पथ पर आगे बढ़ते रहना चाहिए. देखिए अच्छी बात.