बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कथा के दौरान भक्तों को पाखंड से दूर रहने की सलाह दी. उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि 'आजकल के लोगों के कर्म काले हैं पर स्टेटस भगवान वाले हैं, ऐसी भक्ति किसी काम की नहीं है.' शास्त्री ने जोर देकर कहा कि हनुमान जी चित्र से नहीं बल्कि चरित्र से रीझते हैं, इसलिए व्यक्ति को अपना चेहरा चमकाने के बजाय अपना चरित्र चमकाना चाहिए. उन्होंने रामायण के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे भगवान राम ने रावण की पत्नी मंदोदरी को 'माँ' कहकर संबोधित किया था, जो उनके महान चरित्र का प्रमाण है. धीरेंद्र शास्त्री ने भक्तों से कहा कि या तो हनुमान जी को पूरी तरह अपना लो या उन्हें छोड़ दो, क्योंकि आधे-अधूरे मन से की गई भक्ति फलदायी नहीं होती. उन्होंने यह भी सूत्र दिया कि कामयाब इंसान खुश रहे न रहे, लेकिन खुश रहने वाला इंसान जरूर कामयाब होता है.