बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हनुमान चरित्र और प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर प्रकाश डाला. उन्होंने रावण वध के बाद मंदोदरी और श्रीराम के बीच हुए एक भावुक प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा, 'एक मेरा पति था जो दूसरों की स्त्री को अपना बनाना चाहता था और एक राम तुम हो जो छाया देखकर भी मां कहकर संबोधित करते हो.' शास्त्री ने समझाया कि रावण बल, वैभव और परिवार में बड़ा होने के बावजूद केवल अपने चरित्र की कमी के कारण हारा. उन्होंने श्रोताओं को प्रेरित किया कि चित्र के बजाय चरित्र को शुद्ध करने पर ध्यान दें, क्योंकि अंत समय में केवल कर्मों की कमाई ही साथ जाती है. उन्होंने जीवन की नश्वरता पर जोर देते हुए कहा कि सांसों का कोई भरोसा नहीं है, इसलिए अभी से राममय जीवन जीना शुरू करें.