अच्छी बात के इस एपिसोड में भगवान के साकार और निराकार स्वरूप का बहुत ही सुंदर और सरल वर्णन किया गया है. पानी और बर्फ के उदाहरण से समझाया गया है कि कैसे निराकार ईश्वर अपने भक्तों के प्रेम के कारण साकार रूप धारण कर लेते हैं. आदि जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा बद्रीनाथ धाम की स्थापना का प्रसंग यह स्पष्ट करता है कि तपस्या और भक्ति से भगवान को कैसे पाया जा सकता है. इसके साथ ही, महाराष्ट्र के भक्त पुंडलिक और माता शबरी की अद्भुत कथाओं के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि ईश्वर को पाने के लिए कठोर तपस्या से अधिक सच्ची श्रद्धा और शरणागति की आवश्यकता होती है. माता-पिता की सेवा में लीन पुंडलिक के लिए भगवान विट्ठल स्वयं उनके द्वार पर आ गए थे और शबरी की निस्वार्थ प्रतीक्षा ने भगवान राम को उनकी कुटिया तक पहुंचा दिया था. यह प्रसंग बताता है कि सच्ची भक्ति से ईश्वर स्वयं भक्त को ढूंढते हुए आते हैं. देखिए अच्छी बात.