अच्छी बात के इस एपिसोड में पंडित धीरेंद्र शास्त्री बता रहे हैं कि त्रेता युग में भगवान शिव अपनी अर्धांगिनी माता सती के साथ कुंभज ऋषि के पास कथा सुनने गए थे, कुंभज ऋषि द्वारा भगवान शिव की पूजा करने पर माता सती को संदेह हुआ कि एक वक्ता श्रोता की पूजा क्यों कर रहा है. इसके बाद रास्ते में भगवान शिव ने माता सीता के वियोग में दुखी भगवान राम को प्रणाम किया, जिससे सती का संदेह और बढ़ गया. कथा में यह स्पष्ट किया गया है कि भगवान परीक्षा से नहीं, बल्कि प्रतीक्षा से प्राप्त होते हैं, जैसे माता शबरी ने राम की प्रतीक्षा की थी, जबकि शूर्पणखा ने परीक्षा ली थी. इसके साथ ही कथा में श्रोताओं के चार प्रकार- श्रोता, सरौता, सोता और वास्तविक श्रोता का भी वर्णन किया गया है. हरियाणा और गुजरात के चंगीलाल नामक व्यक्तियों के हास्य प्रसंगों के माध्यम से कथा में ध्यान लगाने और भगवान पर विश्वास रखने का संदेश दिया गया है. देखिए अच्छी बात.