नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने समझाया कि देवी की साधना कैसे करनी चाहिए. जैसे विदेश गए पति की याद में पत्नी रहती है, जैसे गाय के चित्त में बछड़ा रहता है, वैसे ही साधक का मन सदैव आराध्य के चरणों में रहना चाहिए. ब्रह्मचारिणी वह देवी हैं, जिन्होंने भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए तपस्या की थी. उनकी उपासना से तपस्या निर्विघ्न सफल होती है. ब्रह्म का अर्थ है जो अनंत, निर्लोभ और निर्द्वंद है. प्रवचन में महारावण वध की कथा भी सुनाई गई. जब राम जी महारावण के सामने नहीं टिक पाए तो माता जानकी ने अपना आदिशक्ति रूप धारण किया और करोड़ों योगनियों के साथ महारावण का वध कर दिया. यह कथा मां की अपार शक्ति को दर्शाती है.