धार्मिक स्थलों और आश्रमों में प्राप्त दान का उपयोग समाज कल्याण, गरीब बेटियों के विवाह तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए किया जा रहा है। आयोजन के दौरान यह बात रेखांकित की गई कि सनातन संस्कृति और परंपराओं का प्रभाव वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा है। समाज में जरूरतमंदों की सहायता के उद्देश्य से प्रतिवर्ष सैकड़ों निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह आयोजित किया जाता है, जिस पर करोड़ों रुपये का व्यय होता है। इसके साथ ही, आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एक सर्वसुविधायुक्त अस्पताल का निर्माण भी प्रगति पर है। आश्रम में प्रतिदिन अनवरत भंडारे का संचालन होता है, जहां हजारों लोगों को भोजन प्राप्त होता है। प्रवचन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि धन का अर्जन कर उसका उपयोग समाज सेवा और परमार्थ के कार्यों में करना चाहिए।