श्रीमद्भागवत महापुराण को भगवान का साक्षात वांगमय विग्रह और वैष्णवों का परम धन बताया गया है. भागवत का प्रत्येक अक्षर भगवान का ही स्वरूप माना जाता है. इसमें वैष्णव परंपरा की परिभाषा स्पष्ट करते हुए बताया गया है कि जो राम या कृष्ण की उपासना करता है, कंठी माला और तिलक धारण करता है तथा तुलसी सेवा करता है, वही सच्चा वैष्णव है. कथा में प्रह्लाद, विभीषण, भरत और राजा बलि के त्याग का उल्लेख किया गया है, जिन्होंने धर्म और ईश्वर के मार्ग में बाधक बनने वाले संबंधों का भी त्याग कर दिया. इसके अलावा, श्रीराम और माता कैकेयी के प्रसंग का वर्णन है, जिसमें बालक राम द्वारा 14 वर्ष के वनवास का वरदान मांगने और कैकेयी के महान त्याग की कथा बताई गई है. यह संदेश दिया गया है कि सच्चा त्यागी वही है जो ईश्वर से दूर करने वाले तत्वों का त्याग करता है.