छत्तीसगढ़ में पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने अपने प्रवचन में ईश्वर के प्रति समर्पण यानी शरणागति के लक्षणों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने बताया कि शरणागति के छह लक्षण होते हैं, जिनमें से पांच का उन्होंने वर्णन किया. भगवान के अनुकूल रहना, भगवान को जो प्रिय न हो उसका त्याग करना, भगवान पर अटूट भरोसा रखना, हर समय भगवान को धन्यवाद देना, और जो कुछ भी मिला है उसे भगवान का मानना. उन्होंने प्रहलाद, भरत, विभीषण और राजा बलि के पौराणिक उदाहरण देते हुए समझाया कि कैसे इन लोगों ने ईश्वर के लिए अपने सगे-संबंधियों का भी त्याग कर दिया था. उन्होंने कहा, 'विचार करो, हम दुखी क्यों हैं? अपने से ऊपर वालों को देखेंगे तो दुखी हो जाएंगे. अपने से नीचे वालों को देखेंगे तो सुखी हो जाएंगे.' उन्होंने श्रोताओं को ऐसे लोगों की संगत से बचने की सलाह दी जो उन्हें भगवान से दूर ले जाते हैं और अच्छे संतों का साथ करने के लिए प्रेरित किया. देखिए अच्छी बात.