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Acchi Baat: जब सच्ची भक्ति और गुरु की कृपा से शिष्य को हुए साक्षात भगवान के दर्शन, देखिए अच्छी बात

वृंदावन के एक सिद्ध संत और उनके शिष्य की यह कथा गुरु और शिष्य के बीच के समर्पण को दर्शाती है. संत नियम के बहुत पक्के थे. एक दिन जब शिष्य ठाकुर जी के लिए प्रसाद बना रहा था, तब कुछ बाहरी लोगों ने झोपड़ी में झांक लिया. इस पर क्रोधित होकर गुरुजी ने शिष्य को बहुत पीटा, लेकिन शिष्य ने बिना किसी शिकायत के दोबारा प्रसाद बनाया. जब शिष्य रोया, तो इसलिए नहीं कि उसे मार पड़ी, बल्कि इसलिए कि ठाकुर जी को भोग मिलने में देरी हुई. उसकी इस भक्ति को देखकर गुरुजी ने उसे आशीर्वाद दिया. अगले दिन वृंदावन की परिक्रमा के दौरान शिष्य की तबीयत बिगड़ गई. अपने अंतिम समय में उसने गुरुजी का चरणामृत पिया और उन्हें देखते हुए प्राण त्यागने की इच्छा जताई. अंत में शिष्य को साक्षात भगवान के दर्शन हुए. यह कथा बताती है कि यदि सच्चा गुरु मिल जाए, तो ईश्वर स्वयं चले आते हैं. देखिए अच्छी बात.