पटना, बिहार के रहने वाले शिवकुमार ने पत्र लिखकर पूछा कि जीवन में दुख क्या है, यह क्यों होता है और इससे बचने के उपाय क्या हैं. इसके जवाब में पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि दुख के तीन मुख्य कारण हैं- अपेक्षा (आशा), अज्ञानता और वर्तमान को स्वीकार न करना. जब हम दुनिया और लोगों से अपेक्षाएं रखते हैं और वे पूरी नहीं होतीं, तो दुख होता है. इसलिए संसार के बजाय परमात्मा से अपेक्षा रखनी चाहिए. दुख का दूसरा कारण अज्ञानता है. अज्ञानता के कारण मनुष्य जीवन के अनमोल पलों को पत्थरों की तरह फेंक देता है. इससे बचने के लिए एक सच्चे ज्ञानी की शरण लेनी चाहिए. दुख का तीसरा कारण वर्तमान को स्वीकार न करना है. ज्यादातर लोग भूतकाल की चिंता या भविष्य की बेचैनी में जीते हैं. सुखी रहने के लिए वर्तमान में जीना चाहिए. दुनिया को खुश करने के बजाय अपने चरित्र को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए. इन सबके बावजूद यदि जीवन में दुख आए, तो भगवान की शरण में जाना चाहिए. देखिए अच्छी बात.