महाराष्ट्र के अकोला में गणेशोत्सव का पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाया जा रहा है. यहां श्री बारहभाई गणपति पंडाल से विसर्जन शोभायात्रा की पहली पालकी निकली. गणपति विसर्जन की यह शोभायात्रा परंपरा 131 साल पुरानी है. मंदिर में विराजमान गणपति की मूर्ति करीब 150 साल पुरानी है. पेशवा कालीन मूर्ति परंपरा का निर्वहन आज भी उसी श्रद्धा और सम्मान से किया जा रहा है. इस उत्सव को 1893 में नया रूप मिला जब लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक यहां पधारे थे.