बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मेरठ में आयोजित कथा में गुरु-शिष्य परंपरा पर प्रवचन दिया। उन्होंने स्वामी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा कि 'चेला वही है जो अपने गुरु के नाम को बढ़ाए, गुरु के संकल्पों को बढ़ाए।' उन्होंने बताया कि जब स्वामी विवेकानंद ने शिकागो धर्म सम्मेलन में धर्म का डंका बजाया तो उनके साथ-साथ उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस का भी नाम हुआ। कथा में कुम्हार और मटके की उपमा देते हुए शास्त्री जी ने समझाया कि 'गुरु डांटता इसलिए है कि हमारा चेला बिखर ना जाए, ये निखर जावे।' हनुमान चालीसा की चौपाई 'जय जय जय हनुमान गुसाई, कृपा करहु गुरुदेव की नाई' पर प्रवचन करते हुए उन्होंने गुरु कृपा के महत्व पर जोर दिया।