कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कथा के दौरान भगवान शिव की बारात और उनके दिव्य शृंगार का रोचक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि कैसे नंदी, भृंगी और अन्य गणों ने भोलेनाथ की जटाओं का मुकुट और कमर में मृगछाला बांधकर बारात की तैयारी की। इसके साथ ही उन्होंने शादी-ब्याह में लोगों द्वारा किए जाने वाले अत्यधिक शृंगार और वर्तमान समय के मेकअप के चलन पर भी तंज कसा। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि लोग सोचते हैं कि बारात में उन्हें सब देखेंगे, लेकिन असलियत यह है कि कोई किसी को नहीं देखता और हर कोई सिर्फ खुद को ही देखता रहता है। उन्होंने एक पुराने किस्से का उल्लेख करते हुए मेकअप और उससे जुड़ी हास्यास्पद परिस्थितियों पर भी प्रकाश डाला।