इस पूजन विधि में सर्वप्रथम पाद्योपाध्याय, हस्तेय वर्ग और सर्वंगे स्नान कराया जाता है. माँ गौरी का पूजन इस विधि का एक अनिवार्य अंग है, क्योंकि बगैर माँ गौरी के गणपति पूजन स्वीकार नहीं करते हैं. खासकर आज माँ गौरी के साथ ही गणपति का पूजन हो रहा है. पूजन में पयस्नानम, दधी स्नानम, घृत स्नानम, मधु स्नानम और सरकरा स्नानम जैसे शुद्धोधक स्नान शामिल हैं. यदि अलग-अलग स्नान संभव न हो तो पंचामृत से स्नान कराने पर भी वही फल प्राप्त होता है. देखिए पूरा वीडियो.