गुजरात के कच्छ स्थित गांधीधाम में आयोजित एक विशाल कथा के दौरान हनुमान जी की महिमा का बखान किया गया। इस पांच दिवसीय सुंदरकांड कथा में बताया गया कि दुनिया में सबसे बेहतरीन श्रोता और वक्ता दोनों ही हनुमान जी हैं। आयोजन के दौरान कच्छ में हुई बेमौसम बारिश और बर्फबारी का भी जिक्र किया गया, जिसे एक अद्भुत घटना बताया गया। इसके साथ ही कथा में आगे बैठने वाले वीआईपी लोगों पर भी चुटकी ली गई। यह व्यंग्य किया गया कि वीआईपी लोग सबसे बाद में आते हैं, सबसे आगे बैठते हैं और ताली भी नहीं बजाते। इसके अलावा, स्थानीय व्यंजनों जैसे ढोकला, फाफड़ा और दाबेली का उल्लेख करते हुए लोगों से खूब खाने और भजन करने का आग्रह किया गया। अंत में यह महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि ईश्वर चित्र में नहीं बल्कि चरित्र में बसते हैं, इसलिए दिखावे के बजाय अपने चरित्र को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।