मेरठ में आयोजित धार्मिक कथा के दौरान व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को जीवन में सकारात्मकता और भक्ति का संदेश दिया गया. कथावाचक ने कहा कि जीवन में व्यस्त रहने के साथ मस्त रहना आवश्यक है, क्योंकि जो मस्त रहता है उसी के पास समस्त रहता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे गिलास से खारा पानी खाली करने पर ही मीठा पानी भरा जा सकता है, वैसे ही मन से कुविचारों को निकालने के बाद ही सुविचारों और मंगल का प्रवेश संभव है. कथा को कुविचार मिटाने वाला साधन बताते हुए कहा गया कि हनुमान जी की भक्ति और सत्संग से जीवन का अमंगल समाप्त होता है. इसके साथ ही संगति के गहरे असर को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया गया कि जैसी संगति होगी, व्यक्ति का आचरण भी वैसा ही बनेगा, इसलिए समय निकालकर ईश्वर की आराधना करनी चाहिए.