इस विशेष संवाद में राम जी की कृपा से जीवन में बदलाव के पांच महत्वपूर्ण प्रमाण दिए गए हैं. पहला प्रमाण वाल्मीकि जी का है, जिन्हें राम जी की कृपा से ब्रह्म के समान स्थान मिला. दूसरा प्रमाण नारद जी का है, जिनका दासी पुत्र से ब्रह्मा पुत्र बनने का उल्लेख है. विभीषण का उदाहरण दिया गया, जिन्हें राम जी की कृपा से मंत्री से प्रधानमंत्री की उपमा मिली. चौथा प्रमाण सुग्रीव जी का है, जिन्होंने संकट के समय राम जी का साथ पाकर राजा का पद पाया. पांचवां प्रमाण शबरी माता का है, जो राम जी की प्रतीक्षा और उपासना करते हुए धन्य होती हैं. 'जा पर कृपा राम की होई ता पर कृपा करे' इस चौपाई के माध्यम से यह समझाया गया है कि जिस पर राम जी की कृपा होती है, उसके जीवन में असाधारण परिवर्तन संभव है.