श्री सत्यनारायण भगवान के व्रत की महिमा और उसकी सटीक विधि का वर्णन कर रहे हैं. धीरेंद्र शास्त्री के अनुसार, 'सत्यनारायण का व्रत मतलब सत्य के व्रत को जो करेगा, सत्य के पालन को जो करेगा, उसकी सर्वत्र विजय होगी.' उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कथा के लिए सायंकाल यानी गोधूलि बेला का समय सबसे उत्तम होता है, जब गायों के खुर से धूल उड़ती है. कथा में गेहूं के चूर्ण (पंजीरी), केले के फल, घी, दूध और शक्कर के महत्व को बताया गया है. इसके साथ ही, स्कंद पुराण के रेवाखंड से निर्धन ब्राह्मण और लकड़हारे की कथा सुनाई गई है, जिसमें बताया गया है कि कैसे भक्ति और सत्य के संकल्प से उनकी दरिद्रता दूर हुई. वक्ता ने जोर दिया कि केवल कर्मकांड ही नहीं, बल्कि जीवन में सत्य बोलना और सत्य के मार्ग पर चलना ही इस व्रत का वास्तविक उद्देश्य है.