Sharad Purnima | धार्मिक और लोक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होते हैं और उनकी किरणें अमृत के समान मानी जाती हैं. इसी कारण रात में खुले आसमान के नीचे खीर रखने और अगली सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की सदियों पुरानी परंपरा है. आयुर्वेद के अनुसार शरद ऋतु में शरीर में पित्त दोष बढ़ जाता है, जिससे फ्लू, त्वचा विकार और बुखार जैसी बीमारियां पनपती हैं. गाय का दूध, चावल और मिश्री पित्त दोष को शांत करते हैं और शरीर का ओजस बढ़ाते हैं. इसके अलावा, ज्योतिष शास्त्र में खीर का संबंध चंद्रमा और माता लक्ष्मी से माना गया है, जिससे सुख-शांति मिलती है.