कथावाचक ने लुधियाना में हनुमान कथा के दौरान श्राद्ध पक्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केवल श्राद्ध कर्म से तीन पीढ़ियों का उद्धार होता है, लेकिन यदि श्रद्धा भाव से प्रभु की कथा सुनी जाए तो इक्कीस पीढ़ियों का उद्धार संभव है. बिना श्रद्धा के परमात्मा की प्राप्ति अत्यंत कठिन है. उन्होंने रामायण का प्रसंग समझाते हुए कहा कि युद्ध से पीछे न हटने वाले लक्ष्मण जी वीर हैं, कभी पराजित न होने वाले हनुमान जी महावीर हैं और युद्ध के निर्माता प्रभु श्रीराम रघुवीर हैं. वाल्मीकि रामायण यदि फल है, तो गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस उसका सार रूपी निचोड़ है. कथा में एक दृष्टांत के जरिए उन्होंने गुरु पर अटूट विश्वास और श्रद्धा की महिमा बताई. उन्होंने कहा कि गुरु के वचनों पर पूर्ण निष्ठा रखने से साधारण शब्द भी महामंत्र बन जाता है, क्योंकि शास्त्र भी कहते हैं कि विश्वास ही फल का मूल कारण होता है.