इस प्रवचन में सच्चे संत की परिभाषा बताई गई है। यह स्पष्ट किया गया है कि केवल तिलक लगाने, माला पहनने या लंबे बाल रखने से कोई साधु नहीं बन जाता। सच्चा संत वह है जिसका मन निर्मल हो और जो दूसरों की समस्याओं को दूर करने का संकल्प ले। इसके साथ ही, एक पौराणिक कथा का भी वर्णन किया गया है जिसमें राजा सुकंत की रक्षा के लिए भगवान हनुमान और भगवान राम के बीच युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। कथा के अनुसार, देवर्षि नारद के कहने पर राजा सुकंत ने संत सभा में ऋषि विश्वामित्र को प्रणाम नहीं किया। इससे क्रोधित होकर विश्वामित्र ने भगवान राम से राजा को दंड देने के लिए कहा। अपने प्राण बचाने के लिए राजा सुकंत माता अंजनी की शरण में गए। माता के आदेश पर भगवान हनुमान ने राजा सुकंत की रक्षा करने की प्रतिज्ञा ली, जिसके कारण उन्हें अपने आराध्य भगवान राम के खिलाफ ही खड़ा होना पड़ा।