कथा के दौरान भक्त के तीन प्रमुख लक्षणों भाव, भरोसा और भोलापन का विस्तार से वर्णन किया गया. उदाहरण देते हुए बताया गया कि कर्मा बाई के निश्छल भाव के कारण भगवान जगन्नाथ स्वयं भोग स्वीकार करने आते थे. इसी तरह वृंदावन के संत कदम्ब खंडी जी महाराज के अटूट भरोसे का प्रसंग सुनाया गया, जिनकी लताओं में उलझी जटाओं को सुलझाने के लिए स्वयं भगवान श्रीकृष्ण और श्री राधा रानी को आना पड़ा. भक्त नामदेव के जीवन से जुड़े प्रसंग के जरिए बच्चों जैसे निष्कपट और सरल भोलापन के महत्व को रेखांकित किया गया. इसके साथ ही सांसारिक जीवन में समय की महत्ता पर चर्चा करते हुए कहा गया कि सब कुछ समय के अधीन है.