पटना के शिवकुमार के पत्र का उत्तर देते हुए जीवन में दुख के मुख्य कारणों और उनसे बचने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई है। प्रवचन में बताया गया कि मनुष्य के जीवन में दुख के तीन सबसे बड़े कारण हैं- अपेक्षाएं, अज्ञानता और वर्तमान को स्वीकार न करना। जब हम दुनिया और लोगों से बहुत अधिक उम्मीदें लगा लेते हैं और वे पूरी नहीं होतीं, तो हमें निराशा का सामना करना पड़ता है। दुख का दूसरा कारण अज्ञानता है। अज्ञानता के कारण मनुष्य जीवन के अनमोल पलों को नष्ट कर देता है, ठीक वैसे ही जैसे एक व्यक्ति ने अंधेरे में हीरों को पत्थर समझकर नदी में फेंक दिया था। दुख का तीसरा कारण वर्तमान को स्वीकार न करना है। अधिकांश लोग या तो भूतकाल की चिंताओं में डूबे रहते हैं या भविष्य की उधेड़बुन में लगे रहते हैं। सुखी जीवन का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि इंसान को भूत और भविष्य की चिंता छोड़कर हमेशा वर्तमान में जीना चाहिए और परमात्मा पर पूरा विश्वास रखना चाहिए।