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Acchi Baat: श्री राधा रानी ने बेटी का धर्म कैसे निभाया? देखिए अच्छी बात पंडित धीरेंद्र शास्त्री के साथ

कथा में बताया गया है कि भगवान सदैव अपने सच्चे भक्तों के भाव के वशीभूत होते हैं. बरसाने में रहने वाले एक धनी सेठ की कोई पुत्री नहीं थी, जिसके कारण वे अत्यंत दुखी रहते थे. एक संत के परामर्श पर उन्होंने श्री राधा रानी को ही अपनी बेटी मान लिया और अत्यंत निष्ठा से पिता का धर्म निभाने लगे. एक दिन त्योहार पर घर आई मनहारन ने सेठ की तीनों बहुओं के साथ घूंघट में बैठी एक चौथी कन्या को भी चूड़ियां पहना दीं. जब मनहारन ने चार लोगों की चूड़ियों का मूल्य मांगा, तो सेठ जी ने क्रोध में आकर मना कर दिया. रात्रि में किशोरी जी ने स्वप्न में आकर उलाहना दिया कि पिता मानकर चूड़ियां पहनी थीं, परंतु आपने उसका मोल नहीं चुकाया. सेठ जी को अपनी भूल का अहसास हुआ और वे रोते हुए मनहारन के घर क्षमा मांगने पहुंचे. यह प्रसंग कलयुग में भक्त और भगवान के दिव्य संबंध को दर्शाता है.