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अब नहीं टूटेगा पिता बनने का सपना! बचपन में फ्रीज टिश्यू से 16 साल बाद बना स्पर्म

बड़ों के लिए तो इलाज से पहले स्पर्म फ्रीज करने का विकल्प होता है, लेकिन छोटे बच्चों में अभी स्पर्म बनना शुरू नहीं होता. इसलिए उनके लिए यह तरीका काम नहीं करता.

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विज्ञान की दुनिया से एक बेहद अहम और उम्मीद जगाने वाली खबर है. वैज्ञानिकों ने पहली बार यह साबित कर दिया है कि बचपन में फ्रीज किया गया टेस्टिकुलर टिश्यू, कई साल बाद शरीर में वापस लगाने पर स्पर्म (शुक्राणु) बना सकता है. यह खोज उन बच्चों के लिए बड़ी राहत बन सकती है, जो गंभीर बीमारियों के इलाज के कारण भविष्य में पिता बनने की क्षमता खो सकते हैं.

10 साल की उम्र में हुआ था सिकल सेल
दरअसल, यह मामला 27 साल के एक युवक से जुड़ा है, जब वह सिर्फ 10 साल का था, तब उसे सिकल सेल बीमारी के इलाज के लिए कीमोथेरेपी दी जानी थी. ऐसे इलाज से जान तो बच जाती है, लेकिन कई बार इसका असर प्रजनन क्षमता पर पड़ता है और व्यक्ति आगे चलकर पिता नहीं बन पाता. बड़ों के लिए तो इलाज से पहले स्पर्म फ्रीज करने का विकल्प होता है, लेकिन छोटे बच्चों में अभी स्पर्म बनना शुरू नहीं होता. इसलिए उनके लिए यह तरीका काम नहीं करता. इसी चुनौती को देखते हुए डॉक्टरों ने उस समय बच्चे के अंडकोष का एक छोटा हिस्सा निकालकर उसे फ्रीज कर लिया था.

16 साल बाद ट्रांसप्लांट किए गए टिश्यू
करीब 16 साल बाद, जब वह बच्चा बड़ा हुआ, तो डॉक्टरों ने उसी फ्रीज किए गए टिश्यू को उसके शरीर में फिर से ट्रांसप्लांट किया. कुछ टिश्यू अंडकोष के अंदर और कुछ त्वचा के नीचे लगाए गए. हैरानी की बात यह रही कि लगभग एक साल बाद जांच में पता चला कि इन टिश्यू में स्पर्म बनने लगे हैं. यह पहली बार है जब इस तरीके से इंसान के शरीर में स्पर्म बनने की पुष्टि हुई है.

IVF के जरिए बन सकते हैं पिता
इस रिसर्च का नेतृत्व वैज्ञानिक एलेन गूसेंस ने किया उनका कहना है कि यह एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि है, जो भविष्य में हजारों लोगों के लिए उम्मीद का रास्ता खोल सकती है. हालांकि अभी इस तकनीक से प्राकृतिक तरीके से बच्चा होना संभव नहीं है, क्योंकि बने हुए स्पर्म शरीर के सामान्य रास्ते से बाहर नहीं आ सकते लेकिन इनका इस्तेमाल IVF (टेस्ट ट्यूब बेबी) तकनीक में किया जा सकता है. फिलहाल वैज्ञानिक यह जांच कर रहे हैं कि ये स्पर्म अंडाणु को सफलतापूर्वक निषेचित कर सकते हैं या नहीं.

3,000 से ज्यादा बच्चों के टिश्यू किए गए हैं फ्रीज
विशेषज्ञ रॉड मिशेल का भी कहना है कि यह खोज इस दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे यह साबित हो गया है कि यह तकनीक काम कर सकती है. गौरतलब है कि दुनिया भर में 3,000 से ज्यादा बच्चों के ऐसे टिश्यू पहले से ही फ्रीज करके रखे गए हैं आने वाले समय में यह तकनीक उन सभी के लिए नई उम्मीद बन सकती है, जो गंभीर बीमारियों के इलाज के कारण अपनी फर्टिलिटी खोने के खतरे से जूझ रहे हैं.