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चांद पर केवल जाना ही नहीं बल्कि रहना और काम करना भी होगा मुमकिन, NASA ने बताया कितना समय लगेगा

चांद पर केवल जाना ही नहीं बल्कि रहना और काम करना भी मुमकिन होने वाला है. इसके बारे में नासा ने हाल ही में बताया है. अमेरिकी एजेंसी के ओरियन लूनर स्पेसक्राफ्ट प्रोग्राम के प्रमुख हॉवर्ड हू के मुताबिक, ऐसा साल 2030 तक हो सकेगा.  

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Human on Moon Human on Moon
हाइलाइट्स
  • इसे पूरा होने में लग जाएंगे कुछ साल

  • पूरी दुनिया के लिए बड़ा कदम 

क्या आपने कभी पृथ्वी के बाहर किसी ग्रह पर रहने के बारे में सोचा है. बचपन में हम चांद, अंतरिक्ष में जाने के सपने देखा करते थे. हालांकि कि ये जल्द पूरा होने वाला है. वो दिन दूर नहीं है जब इंसान चांद पर जाएगा. और केवल जाना ही नहीं बल्कि वहीं रह भी सकेगा. स्पेस एजेंसी नासा के मुताबिक, अंतरिक्ष यात्री जल्द ही चांद पर रह सकेंगे और काम कर सकेंगे. अमेरिकी एजेंसी के ओरियन लूनर स्पेसक्राफ्ट प्रोग्राम के प्रमुख हॉवर्ड हू के मुताबिक, ऐसा साल 2030 तक हो सकेगा.  

इसे पूरा होने में लग जाएंगे कुछ साल
 
ओरियन लूनर स्पेसक्राफ्ट प्रोग्राम के प्रमुख हॉवर्ड हू ने कहा कि मनुष्य 2030 से पहले कुछ समय के लिए चंद्रमा पर सक्रिय रूप से मौजूद रहने में सक्षम हो सकता है. हालांकि, कितने समय तक हम चांद की सतह पर रहेंगे यह अभी जानना बाकी है. गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार हॉवर्ड हू ने बीबीसी को बताया, “जो लोग चांद पर रहेंगे वे केवल वहां जाएंगे ही नहीं बल्कि उनके पास रहने के लिए घर होंगे, उनके पास जमीन पर रोवर्स होंगे.”  

पूरी दुनिया के लिए बड़ा कदम 

ओरियन लूनर स्पेसक्राफ्ट प्रोग्राम के हॉवर्ड हू ने आगे बताया कि यह पहला कदम है जब हम स्पेस को बहुत अंदर तक एक्स्प्लोर करने के लिए उठा रहे हैं. केवल अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए ये कदम उठाया जा रहा है. मुझे लगता है कि यह नासा के लिए एक ऐतिहासिक दिन है, लेकिन यह उन सभी लोगों के लिए भी एक ऐतिहासिक दिन है जो लोग स्पेस फ्लाइट और डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन से प्यार करते हैं.

हॉवर्ड ने कहा, "हम चांद पर वापस जा रहे हैं. हम एक स्थायी कार्यक्रम की दिशा में काम कर रहे हैं और यह वह वाहन है जो लोगों को ले जाएगा. ये हमें फिर से चंद्रमा पर ले जाएगा."

नासा आर्टेमिस 1 को भेजा गया था 

तकनीकी गड़बड़ियों और कई परेशानियों के बाद, नासा आर्टेमिस 1 को पिछले सप्ताह फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से लॉन्च किया गया था. इस पहली उड़ान में कोई भी सवार नहीं था, बस तीन टेस्ट डमी थीं. ये कैप्सूल चंद्रमा के चारों ओर एक विस्तृत कक्षा की ओर गया था और फिर लगभग तीन सप्ताह में प्रशांत स्पलैशडाउन के साथ पृथ्वी पर लौटा था.