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Human Psychology: सुनते नहीं दूसरे की पूरी बात, फिर भी समझ जाते हैं मतलब... जादू है या कुछ और, जानें क्या कहती है साइकोलॉजी?

कुछ लोगों को आदत होती है कि वह बातचीत के दौरान दूसरे की बात को काट देते है. ऐसा करना एक गलत इशारा माना जाता है, लेकिन ऐसे लोगों के बारे में साइकोलॉजी कुछ अलग ही कहती है. साथ ही अक्सर वह ऐसा क्यों करते हैं इसका भी जवाब देती है.

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कई लोग को आदत होती है कि बातचीत के दौरान वह सामने वाले को बात पूरी करने का मौका नहीं देते. इसे अक्सर बदतमीजी या बीच में टोकने की आदत मान लिया जाता है. लेकिन साइकोलॉजी की कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि हर बार ऐसा करने वाले लोगों का इरादा किसी की बात काटना नहीं होता. दरअसल उनका दिमाग सामने वाले की बात को बहुत तेजी से समझ लेता है और वह अनजाने में अगला शब्द बोल देते हैं.

कुछ लोगों का दिमाग बातचीत के दौरान बहुत तेजी से काम करता है. ऐसे लोग सामने वाले की बात का मतलब, बात को बिना पूरा हुआ समझ लेते हैं. इसी वजह से वे बिना सोचे आगे वाली की बात को काट देते हैं. इसका मतलब यह नहीं कि वे सामने वाले का सम्मान नहीं करते. कई मामलों में यह सिर्फ उनकी सोचने की स्पीड से चलते हो जाता है.

स्ट्रॉन्ग कनेक्शन में होता है अक्सर

बेस्ट फ्रेंड, परिवार या लंबे समय से साथ रहने वाले लोगों में यह आदत ज्यादा देखने को मिलती है. जब दो लोग एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह जानते हैं, तो कई बार वे एक-दूसरे की बात पहले से ही समझ जाते हैं. ऐसे में बातचीत में बात पूरा होने की गुंजाइस कई बार नहीं रहती. लेकिन जरूरी नहीं कि हर बार आप बिना पूरी बात सुने अगले की मंशा को समझ लें.

क्यों बचें बात काटने से?

अगर आप ऐसा करते हैं, और इसके पीछे आपका कोई गलत इरादा भी नहीं, लेकिन इसका नुकसान भी है. अगर बार-बार आप किसी को उसकी बात पूरी नहीं करने देते, तो दूसरे को महसूस हो सकता है कि उसकी बात पूरी तरह से नहीं सुनी जा रही है. इसलिए दूसरे की बात काटने से पहले उसे बात पूरी करने का मौका पूरा दें, बेशक आप बात का मतलब जानते हो.

अगर आपको लगता है कि आप भी अक्सर दूसरों की बात पूरी कर देते हैं, तो पहले ध्यान से सुनने की आदत डालें. सामने वाला बोलना खत्म कर ले, उसके बाद जवाब दें.