worlds largest whale graveyard (photo: AP)
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हिंद महासागर की तलहटी में वैज्ञानिकों को एक ऐसी चीज मिली है, जिसने पूरी वैज्ञानिक दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. चीन के वैज्ञानिकों ने समुद्र के भीतर एक विशाल क्षेत्र खोजा है, जहां लाखों साल पुरानी व्हेलों के कंकाल फैले हुए हैं. इसे अब दुनिया का सबसे बड़ा 'व्हेल कब्रिस्तान' माना जा रहा है. रिसर्च के मुताबिक यह अब तक का सबसे गहरा और सबसे पुराना ज्ञात व्हेल कब्रिस्तान है. यहां मिले कुछ जीवाश्म करीब 53 लाख साल पुराने बताए जा रहे हैं. इस खोज के लिए चीनी वैज्ञानिकों ने 'फेंडोजे' नाम की एक छोटी पनडुब्बी का इस्तेमाल किया था.
32 बार समुद्र में उतरी पनडुब्बी
वैज्ञानिकों ने साल 2023 के दौरान कुल 32 बार लगातार गहरी समुद्री डुबकियां लगाईं. इसके बाद जो तस्वीर सामने आई, उसने सभी को हैरान कर दिया. यह क्षेत्र ऑस्ट्रेलिया के पश्चिम में हिंद महासागर के भीतर लगभग 1,200 किलोमीटर तक फैला हुआ है, जिसे 'डायमेंटीना जोन' कहा जाता है.
7 किलोमीटर गहराई से निकाले गए नमूने
रोबोटिक आर्म्स की मदद से वैज्ञानिकों ने समुद्र की सतह से करीब 7 किलोमीटर नीचे जाकर लगभग 500 कंकालों के नमूने जुटाए. विशेषज्ञों का अनुमान है कि पूरे इलाके में 1 करोड़ से ज्यादा व्हेलों के कंकाल मौजूद हो सकते हैं.
व्हेल की मौत को कहते हैं 'व्हेल फॉल'?
जब किसी व्हेल की मौत के बाद उसका विशाल शरीर समुद्र की तलहटी में जाकर गिरता है, तो उसे वैज्ञानिक भाषा में 'व्हेल फॉल' कहा जाता है. समुद्र की अंधेरी और ठंडी गहराइयों में यही मृत शरीर कई जीवों के लिए भोजन और ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत बन जाते हैं.
क्यों बना यह इलाका व्हेलों का कब्रिस्तान?
फिलहाल वैज्ञानिकों का मानना है कि यह क्षेत्र कभी व्हेलों के लिए बेहद पसंदीदा इलाका रहा होगा. यहां समुद्र के नीचे मौजूद 'V' आकार की विशाल खाई मर चुकी व्हेलों के शरीरों को एक जगह इकट्ठा कर देती थी. इसी वजह से समय के साथ यह पूरा क्षेत्र व्हेलों के कब्रिस्तान में बदल गया.
कंकालों के बीच बस गई नई दुनिया
हैरानी की बात यह है कि इन कंकालों के आसपास एक अलग ही समुद्री दुनिया विकसित हो चुकी है. वैज्ञानिकों ने यहां कई ऐसे जीव देखे हैं, जिन्हें पहले कभी दर्ज नहीं किया गया. इनमें खास तरह की जेलीफिश, ब्रिटिल स्टार्स, हड्डियां खाने वाले कीड़े और बाइवाल्व्स शामिल हैं. इतना ही नहीं, व्हेल की एक विलुप्त प्रजाति के जीवाश्म भी यहां मिले हैं.
कार्बन भंडारण का भी बड़ा केंद्र
रिसर्च टीम के अनुसार इन विशाल कंकालों में मौजूद वसा और ऊतक करीब 67 लाख टन कार्बन को अपने भीतर समेटे हुए हैं. यही वजह है कि यह क्षेत्र गहरे समुद्र के जीवों के लिए पोषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज गहरे समुद्र में जीवन के विकास को समझने में बड़ी मदद करेगी. विशेषज्ञों ने इसकी तुलना 1977 में हुई हाइड्रोथर्मल वेंट्स की ऐतिहासिक खोज से की है. उनका मानना है कि समुद्र की गहराइयों में अभी ऐसे कई रहस्य छिपे हैं, जो आने वाले समय में दुनिया को चौंकाने वाले हैं.
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