इस आध्यात्मिक प्रवचन में राजा और फकीर की एक प्रेरक कहानी के माध्यम से जीवन की अनित्यता का संदेश दिया गया है. कथा के अनुसार फकीर ने राजा को एक चमत्कारिक अंगूठी दी, जिसमें लिखा था कि 'जो है सो बीत जाएगा'. जब राजा युद्ध में हारकर संकट में फंसा और बाद में जब पुनः अपना साम्राज्य जीतकर अहंकार में आया, दोनों समय इस संदेश ने उसे धैर्य और नम्रता सिखाई. प्रवचन में स्पष्ट किया गया है कि संसार में सुख और दुख स्थायी नहीं होते, इसलिए विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कुराना चाहिए. भगवान श्रीकृष्ण, श्रीराम, माता सीता और मीराबाई के जीवन के उदाहरण देते हुए समझाया गया है कि हर महान आत्मा को दुखों का सामना करना पड़ा है. अंत में मनुष्य तन, भारत में जन्म और सनातन धर्म की प्राप्ति को जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया गया है.