
Sandhya Bishnoi
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अजरबैजान के बाकू में आयोजित अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में राजस्थान के भीलवाड़ा की पहलवान बेटी संध्या विश्नोई ने 46 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीता. संध्या विश्नोई फाइनल मुकाबले में जापान की कोकोना मंकीनो से 11-2 से हार गई. कुश्ती के दौरान संध्या के कान और हाथ में चोट लगी, लेकिन दर्द के बावजूद इसने अपना पूरा दमख़म लगाया.
संध्या का भव्य स्वागत-
सिल्वर मेडल जीत कर भीलवाड़ा पहुंची संध्या विश्नोई को खेलप्रेमियों ने फूल-मालाओं से लाद दिया. पहलवान बेटी संध्या विश्नोई ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच, माता-पिता और मामा को दिया. उन्होंने कहा कि चार वर्षों की कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद यह उपलब्धि मिली है. उनका अगला लक्ष्य भारत के लिए विश्व स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना है.
अंडर-17 में जीता सिल्वर मेडल-
संध्या के कोच कल्याण बिश्नोई ने कहा कि अजरबैजान के बाकू में हुई अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के 46 किलो वर्ग में भीलवाड़ा के पुर की पहलवान संध्या विश्नोई ने सिल्वर मेडल जीता हैं. संध्या ने चैंपियनशिप की शुरुआत शानदार अंदाज में की थी. पहले मुकाबले में उन्होंने पोलैंड की पहलवान को 10-0 से हराया. इसके बाद क्वार्टर फाइनल में रूस की पहलवान को भी 10-0 से मात दी.

सेमीफाइनल में 30 सेकंड में दी मात-
कोच कल्याण बिश्नोई ने बताया कि सेमीफाइनल में कजाकिस्तान की पहलवान इनजहू को झोला दांव लगाकर सिर्फ 30 सेकंड में चित कर फाइनल में जगह बनाई थी. फाइनल में जापान की कोकोना मंकीनो ने उन्हें 11-2 से हराया हैं. संध्या अंडर-17 विश्व चैंपियनशिप में इस मुकाम तक पहुंचने वाली राजस्थान की चौथी पहलवान बन गई हैं. वहीं, मेडल जीतने वाली तीसरी पहलवान हैं. इससे पहले भीलवाड़ा की अश्विनी विश्नोई गोल्ड मेडल और सीकर की कोमल ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं. भीलवाड़ा की कशिश भी विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुकी हैं. अब आने वाले समय में हमारा टारगेट वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने का है.

पिता फैक्ट्री में करते हैं मजदूरी-
संध्या के पिता निर्मल विश्नोई ने कहा कि मैं भीलवाड़ा की एक फैक्ट्री में मजदूर हैं. संध्या भीलवाड़ा के पुर स्थित शिव व्यायामशाला में अभ्यास करती हैं. लगातार चार सालों से संध्या कुश्ती कर रही है और सुबह शाम रोजाना में उसके साथ उसे छोड़ने के लिए जाता हूं, यहां तक पहुंचाने के लिए संध्या ने और मैंने काफी मेहनत और संघर्ष की है. आज हमें इस बात की बहुत खुशी है कि हमारी बेटी ने सिल्वर मेडल हासिल किया है. परिवार में चार बेटियां हैं और कोई बेटा नहीं है. संध्या की बड़ी बहन भी राष्ट्रीय स्तर की पहलवान रह चुकी हैं. लेकिन चोट के कारण उन्हें कुश्ती छोड़नी पड़ी. आर्थिक अभावों के बावजूद उनके पिता ने बेटियों के खेल के सपनों का साथ नहीं छोड़ा हैं.
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