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Yoga World Championship: 9 साल से कर रहीं योगा, जीत चुकी हैं कई पदक, अब वर्ल्ड कप योगासन चैंपियनशिप में जीता गोल्ड मेडल, जानें मिरांडा हाउस की छात्रा श्रृष्टि दहिया की सफलता की कहानी

Shrishti Dahiya Won the Gold Medal: हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली श्रृष्टि दहिया ने वर्ल्ड कप योगासन चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया है. अहमदाबाद में आयोजित इस चैंपियनशिप में 79 देशों के 522 योगासन एथलीट ने हिस्सा लिया था. आइए श्रृष्टि दहिया की सफलता की कहानी जानते हैं.

Shrishti Dahiya Won the Gold Medal Shrishti Dahiya Won the Gold Medal

दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस की छात्रा श्रृष्टि दहिया ने योग की दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है. श्रृष्टि दहिया ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ा मुकाम हासिल किया है. वर्ल्ड कप योगासन चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर श्रृष्टि दहिया ने न सिर्फ अपने कॉलेज बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है. अहमदाबाद में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया है. ये पहली बार है जब योगासन की कोई वर्ल्ड चैंपियनशिप हुई है.

श्रृष्टि ने किया शानदार प्रदर्शन
4 जून से 8 जून तक गुजरात के अहमदाबाद स्थित EKA Arena में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दुनिया भर के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया. इसी मंच पर श्रृष्टि ने अपने शानदार प्रदर्शन, संतुलन, तकनीक और एकाग्रता से निर्णायकों को प्रभावित करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया. इस चैंपियनशिप में 79 देशों के 522 योगासन एथलीट ने हिस्सा लिया था.

हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली श्रृष्टि ने बताया कि वो पिछले 9 साल से योगा कर रही हैं. वह बताती हैं कि शुरुआत में भाई को योग करते हुए देखकर उन्होंने भी योगा करने की शुरुआत की. बाद में श्रृष्टि को पता चला कि इसे तो बहुत सारे कॉम्पटीशन होते हैं तो उन्होंने उनमें हिस्सा लेना शुरू किया.

श्रृष्टि के पास हैं 120 से ज्यादा मेडल 
आज श्रृष्टि के पास 120 से ज्यादा मेडल हैं, जिनमें 30 नेश्नल और 10 इंटरनेश्नल हैं. श्रृष्टि बताती हैं कि वो हर रोज 4 घंटे से ज्यादा योगा की प्रैक्टिस करती हैं. वो अपनी फिटनेस का खास ख्याल रखती हैं. उन्हें आइस्क्रीम बहुत पसंद हैं लेकिन वो दो महीने में कभी एक बार ही आइसक्रीम खाती हैं.

श्रृष्टि बताती हैं कि उन्हें योगा कॉम्पटीशन में हिस्सा लेने के लिए मां को भी इससे जुड़ना पड़ा. घरवालों की शर्त थी कि श्रृष्टि सिर्फ वहीं जा सकती है, जहां उनकी मां जाएंगी. हालांकि सभी कॉम्पटीशन में घरवालों की एंट्री नहीं होती इसलिये श्रृष्टि की मां ने एक डिप्लोमा कोर्स किया और वो योगा की जज बन गईं. श्रृष्टि बताती हैं कि मां ने कभी भी उनका कोई गेम जज नहीं किया ताकि कोई भेदभाव का आरोप न लगा पाए.

भारत ने योगासन में अपनी वैश्विक ताकत फिर की साबित 
श्रृष्टि कहती हैं कि जल्द ही योगा ओलंपिक और कॉमन वेल्थ गेम्स में शामिल हो जाएगा उसके बाद उनकी निगाहें भी इन गेम्स में गोल्ड मेडल लाने पर होंगी. इस चैंपियनशिप में भारत ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया. मेजबान भारत ने कुल 114 पदक, जिनमें 102 गोल्ड मेडल शामिल रहे, जीतकर योगासन में अपनी वैश्विक ताकत साबित की.