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Gama Pehlwan: जब भी ताकत की होती है बात, भारत के गामा पहलवान का लिया जाता है नाम, 500 से अधिक कुश्ती लड़े, दुनिया में किसी से नहीं हारे

The Great Gama: क्या आप भी पहलवान बनना चाहते हैं तो आज हम आपको भारत के एक ऐसे महान पहलवान के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें दुनिया में कोई नहीं हरा पाया. इस पहलवान ने भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया. जी हां, हम बात कर रहे हैं गामा पहलवान की, जिनका जिनका असली नाम गुलाम मोहम्मद बख्श बट था. गामा पहलवान सिर्फ कुश्ती के लिए ही नहीं बल्कि अपनी भारी-भरकम डाइट के लिए जाने जाते थे. 

Gama Pehlwan (Photo: Social Media) Gama Pehlwan (Photo: Social Media)

आज के समय में अधिकांश युवा मजबूत बॉडी बनाने के लिए घंटों जिम में पसीना बहाते हैं. कई सलमान खान जैसी बॉडी बनाना चाहता है तो कोई टाइगर श्रॉफ जैसी फिटनेस पाने के लिए मेहनत करता है. आज हम आपको भारत के एक ऐसे महान पहलवान के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें दुनिया में कोई नहीं हरा पाया. इस पहलवान ने भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया. जी हां, हम बात कर रहे हैं गामा पहलवान (Gama Pehlwan) की, जिनका जिनका असली नाम गुलाम मोहम्मद बख्श बट था.

गामा पहलवान सिर्फ कुश्ती के लिए ही नहीं बल्कि अपनी भारी-भरकम डाइट के लिए जाने जाते थे. गामा पहलवान का जन्म 22 मई 1878 को पंजाब के कपूरथला जिले के जब्बोवाल गांव में हुआ था. वह एक कश्मीरी मुस्लिम परिवार से थे. गामा के पिता मोहम्मद अजीज बक्श भी एक मशहूर पहलवान थे. गामा जब महज 6 साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया. गामा पहलवान को इतनी छोटी उम्र में पहलवानी का जुनून पैदा हो चुका था. गामा को उनके नाना और मामा ने कुश्ती की बारीकियां सिखाईं और आगे बढ़ने के लिए तैयार किया.

ताकत देखकर हैरान हो जाते थे लोग 
5 फीट 7 इंच लंबे गामा पहलवान बचपन से ही बेहद ताकतवर थे. वे कुश्ती में अपने से बड़े-बड़े पहलवानों को पलक झपकते ही अखाड़े में चित कर देते थे. कम उम्र में ही गामा की ताकत को देख लोग हैरान हो जाते थे. गामा का नाम धीरे-धीरे पूरे भारत में फैलने लगा. गामा बाद में दतिया के महाराजा के दरबार में पहलवान बन गए. रिपोर्ट के अनुसार गामा पहलवान हर दिन 15 घंटे तक कुश्ती का अभ्यास करते थे. गामा पहलवान हर दिन अपने 40 साथियों के साथ कुश्ती की प्रैक्टिस करते थे. वह रोज 5000 बैठक और 1500 से अधिक पुशअप लगाते थे. इतना ही नहीं, वह हर दिन 54 किलो का पत्थर अपने गले में बांधकर दौड़ लगाते थे. सयाजीबाग में बड़ौदा संग्रहालय में एक 2.5 फीट क्यूबिकल पत्थर रखा हुआ है, जिसका वजन लगभग 1200 किलो है. बताया जाता है कि 23 दिसंबर 1902 को गामा पहलवान ने 1200 किलो के इस पत्थर को उठा लिया था.

रोज 10 लीटर दूध और 6 देसी मुर्गे... ऐसी थी डाइट 
133 किलो वजन के गामा पहलवान खानपान भी काफी अलग था. उनकी डाइट में हर दिन 10 लीटर दूध, 6 देसी मुर्गे और करीब 300 ग्राम कुटे हुए बादाम शामिल थे. वह रोज आधा किलो घी और 100 रोटी खाते थे. आपको मालूम हो गामा पहलवान जो डाइट लेते थे, उसमें करीब 10 हजार से अधिक कैलोरी होती थी. चिकन, दूध आदि चीजों से उन्हें काफी अधिक प्रोटीन मिलता था. 

कोई भी पहलवान अखाड़े में हरा नहीं सका
गामा पहलवान अपने 50 साल से ज्यादा लंबे करियर में 5000 से अधिक कुश्ती लड़े लेकिन कोई भी पहलवान उन्हें अखाड़े में कभी भी हरा नहीं सका. गामा पहलवान ने साल 1910 में इंग्लैंड में पोलैंड के मशहूर रेसलर स्टानिस्लॉस जबिश्को को हराया था. आपको मालूम हो कि स्टानिस्लॉस उस समय विश्व चैंपियन माने जाते थे. स्टानिस्लॉस जबिश्को को हराने के बाद गामा पहलवान पूरी दुनिया में मशहूर हो गए. इंग्लैंड से भारत आने के बाद गामा ने नेशनल चैंपियन रहीम सुल्तानीवाला को भी हराया था. आपको मालूम हो कि रहीम का कद 6 फीट 9 इंच था, जबकि गामा की लंबाई सिर्फ 5 फीट 7 इंच थी. इसके बावजूद गामा पहलवान ने अपनी ताकत और फुर्ती से  रहीम को चित कर दिया था. इस जीत के बाद गामा पहलवान को रुस्तम-ए-हिन्द का खिताब दिया गया. 

दिया था खुला चैलेंज 
गामा पहलवान ने एक बार खुला चैलेंज दिया कि वह किसी भी भार वर्ग के 3 पहलवानों को सिर्फ 30 मिनट में हरा सकते हैं. आपको मालूम हो कि शुरू में किसी भी पहलवान ने गामा से कुश्ती लड़ने की हिम्मत नहीं की. बाद में अमेरिकन रेसलर बेंजामिन रोलर ने यह चुनौती स्वीकार की. गामा ने बेंजामिन पहली बार सिर्फ 1 मिनट 40 सेकेंड में और दूसरी बार 9 मिनट 10 सेकेंड में चित कर दिया. अगले दिन गामा ने लगातार 12 पहलवानों को हराकर पूरी दुनिया में अपनी ताकत का लोहा मनवा दिया. 

ब्रूस ली भी थे गामा के दीवाने
आपको मालूम हो कि महान मार्शल आर्टिस्ट और अभिनेता ब्रूस ली भी गामा पहलवान के दीवाने थे. ब्रूस ली ने गामा की ट्रेनिंग और एक्सरसाइज रूटीन के बारे में पढ़ा था और उससे काफी प्रभावित हुए थे. ब्रूस ली ने गामा पहलवान के दंड-बैठक जैसे पारंपरिक व्यायाम को अपनी रोज की ट्रेनिंग में शामिल किया था. ऐसा कहा जाता है कि ब्रूस ली अपनी फिटनेस और ताकत बढ़ाने के लिए हर दिन गामा की एक्सरसाइज फॉलो करते थे. उनकी किताबों व नोट्स में गामा का जिक्र मिलता है. ब्रूस ली मानते थे कि गामा पहलवान की ताकत, फुर्ती और सहनशक्ति बेहद प्रेरणादायक थी. आपको मालूम हो कि आज भी दुनिया भर के कई मार्शल आर्टिस्ट और पहलवान गामा पहलवान की एक्सरसाइज को फॉलो करते हैं. 

आज भी बड़े सम्मान के साथ गामा का लिया जाता है नाम 
आपको मालूम हो कि आजादी के बाद देश का बंटवारा होने पर गामा पहलवान पाकिस्तान में रह गए. उस मुश्किल दौर में गामा पहलवान ने कई हिंदू परिवारों की मदद की और हिंदू परिवारों की जान बचाई. गामा पहलवान को अपनी जिंदगी के आखिरी दिनों में आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा. गामा पहलवान का साल 1960 में 82 साल की उम्र में निधन हो गया. हालांकि आज भी भारत और पाकिस्तान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में गामा पहलवान का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है.