शैलेश कुमार
शैलेश कुमार
जापान के नागोया में आयोजित हो रहे एशियन पैरा गेम्स 2026 के चौथे दिन तक भारतीय पैरा एथलीटों ने कुल 88 पदक जीते, जिसमें 21 गोल्ड पदक शामिल है. भारत की झोली में आए 21 गोल्ड पदक में से एक गोल्ड पदक बिहार के जमुई जिले के एक लाल ने भी जीता है.
जमुई के इस्लाम-नगर अलीगंज प्रखंड के निवासी 26 वर्षीय शैलेश कुमार ने पहले कांस्य फिर गोल्ड पदक जीतकर न केवल जमुई बल्कि बिहार और देश का नाम रौशन किया है. जमुई के शैलेश ने ओलंपिक को छोड़ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित पैरा एथलीट कंपिटीशन में पदक जीतकर 'मेडल लाओ-नौकरी पाओ' योजना के तहत बिहार के नालंदा में सीडीपीओ के पद पर कार्यरत भी है.
शैलेश ने लगाई डेढ़ मीटर से ऊंची छलांग
बिहार के जमुई जिला के शैलेश कुमार ने एशियन पैरा गेम्स में गोल्ड जीतकर फिर एक बार इतिहास रचा है. 1.89 मीटर ऊंची छलांग लगाकर शैलेश ने रिकॉर्ड तोड़कर गोल्ड पदक जीतकर एक बार फिर अपने नाम का परचम लहर, हाई जंप में भारत ने जीते तीनों पदक, जिले में खुशी की लहराया है.
26 वर्षीय पैरा एथलीट शैलेश कुमार ने एक बार फिर देश का मान बढ़ाया है. उन्होंने टी-63 वर्ग की ऊंची कूद स्पर्धा में 1.89 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया.
स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक भारतीयों के नाम
भारत के लिए यह मुकाबला और भी खास रहा, क्योंकि ऊंची कूद स्पर्धा में तीनों पदक भारतीय खिलाड़ियों ने अपने नाम किए. शैलेश कुमार ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि वरुण भाटी ने रजत और राहुल सरोहा ने कांस्य पदक हासिल किया. भारतीय खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन से देश के खेल प्रेमियों में उत्साह है.
खेल के साथ निभा रहे प्रशासनिक जिम्मेदारी भी
शैलेश कुमार बचपन से ही दाहिने पैर से दिव्यांग हैं. इसके बावजूद उन्होंने खेल के प्रति अपनी रुचि और मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है. उनकी सफलता संघर्ष, लगन और दृढ़ संकल्प की मिसाल है.
बिहार सरकार की 'मेडल लाओ, नौकरी पाओ' योजना के तहत शैलेश को सरकारी नौकरी भी मिली है. वर्तमान में वह नालंदा जिले में सीडीपीओ के पद पर तैनात हैं. खेल के मैदान में लगातार उपलब्धियां हासिल करने के साथ वह अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं.
जिले में दौड़ी खुशी की लहर
शैलेश कुमार की इस उपलब्धि पर जिले के लोगों, खेल प्रेमियों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी है. उनके गांव इस्लामनगर सहित पूरे जमुई जिले में खुशी का माहौल है. शैलेश की सफलता ने एक बार फिर साबित किया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी देश का परचम लहराया जा सकता है.
गुरुवार को शैलेश कुमार के गोल्ड मेडल जीतते ही उनके घर में खुशी का माहौल छा गया. गरीब परिवार से आने वाले शैलेश कुमार के मात, पिता, भाई और बहन ने शैलेश की उपलब्धि पर अपनी खुशी जाहिर की है.