Celebrations in Lovpreet Singh's Village
Celebrations in Lovpreet Singh's Village
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की +110 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भारत का नाम रोशन करने वाले भारतीय वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से उनके गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है. लवप्रीत के सिल्वर मेडल जीतने की जैसे ही खबर पहुंची, पूरे गांव में जश्न का माहौल बन गया. परिवार, रिश्तेदार और ग्रामीण ढोल-नगाड़ों के साथ लवप्रीत सिंह के घर पहुंचे, एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया और इस उपलब्धि पर गर्व जताया. परिवार ने बताया कि लवप्रीत सिंह खेल के साथ-साथ भारतीय नौसेना (इंडियन नेवी) में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
सालों की मेहनत का मिला फल
गांव के सरपंच जुगराज सिंह ने कहा कि लवप्रीत सिंह ने न केवल अपने परिवार और गांव बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है. उन्होंने कहा कि करीब 10 से 12 वर्षों की लगातार मेहनत के बाद आज लवप्रीत को यह सफलता मिली है. यह गांव के हर युवा के लिए प्रेरणा है कि साधारण परिवार का बेटा भी कठिन परिश्रम और लगन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकता है. सरपंच ने कहा कि पंचायत गांव के युवाओं को खेलों की ओर प्रेरित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है. गांव में युवाओं के लिए जिम की व्यवस्था की गई है, जहां आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे भी निःशुल्क अभ्यास कर सकते हैं. इसके अलावा वॉलीबॉल, क्रिकेट सहित अन्य खेलों का सामान भी उपलब्ध कराया जाता है ताकि युवाओं को खेलों से जोड़कर नशे जैसी बुराइयों से दूर रखा जा सके. उन्होंने कहा कि लवप्रीत अब गांव के युवाओं के लिए रोल मॉडल बन चुके हैं और उनके गांव लौटने पर भव्य स्वागत किया जाएगा.
2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता था कांस्य पदक
लवप्रीत सिंह के कोच हीरा सिंह ने बताया कि वर्ष 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतने के बाद इस बार उन्होंने रजत पदक हासिल कर अपनी मेहनत का स्तर और ऊंचा साबित किया है. उन्होंने कहा कि बचपन से ही लवप्रीत बेहद मेहनती और अनुशासित खिलाड़ी रहे हैं. यदि उन्हें और बेहतर सुविधाएं तथा आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र मिलें तो भविष्य में वह ओलंपिक में भी भारत के लिए पदक जीत सकते हैं. उन्होंने डीएवी संस्थानों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने खिलाड़ियों को मंच और सुविधाएं उपलब्ध कराईं.
बचपन से ही वेटलिफ्टिंग में दिखाई रुचि
लवप्रीत सिंह के पिता किरपाल सिंह, जो पेशे से दर्जी हैं ने बताया कि उनके बेटे ने बचपन से ही वेटलिफ्टिंग में रुचि दिखाई थी. गांव के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से प्रेरित होकर उसने इस खेल को अपनाया और लगातार मेहनत करता रहा. उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता पर रवाना होने से पहले लवप्रीत ने उनसे वादा किया था कि इस बार वह पदक जीतकर ही लौटेगा और उसने अपना वादा निभा दिया. लवप्रीत की माता सुखविंदर कौर ने भावुक होकर कहा कि यह सब वाहेगुरु की कृपा और बेटे की अथक मेहनत का परिणाम है. उन्होंने बताया कि लवप्रीत ड्यूटी से लौटने के बाद भी घर के कामों में अपने पिता का हाथ बंटाता था और खाली समय में पूरी लगन से अभ्यास करता था. उन्होंने कहा कि आज बेटे ने पूरे परिवार, गांव और देश का नाम रोशन किया है, जिससे उन्हें बेहद गर्व और खुशी महसूस हो रही है. अब पूरे गांव को उम्मीद है कि लवप्रीत भविष्य में ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर भी भारत के लिए स्वर्णिम इतिहास रचेंगे.