scorecardresearch

Uttar Pradesh State Level Wrestling Competition: तमन्ना समाधिया ने जीता मेडल, झांसी की पहली महिला रेसलर बनीं

अंडर-17 फ्री-स्टाइल कुश्ती में झांसी की तमन्ना समाधिया ने कांस्य पदक जीता. तमन्ना जिले की पहली महिला पहलवान हैं, जिसने इस प्रतियोगिता में मेडल जीता है. तमन्ना ने इसके लिए एक महीने तक लगातार प्रैक्टिस की.

Tamanna Samadhia won the medal Tamanna Samadhia won the medal

झांसी की मिट्टी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहां की बेटियाँ किसी से कम नहीं. अंडर-17 आयु वर्ग की 61 किलोग्राम फ्री-स्टाइल कुश्ती में तमन्ना समाधिया ने राज्य स्तरीय चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतकर न सिर्फ जिले, बल्कि पूरे बुंदेलखंड का मान बढ़ाया है. वह इस भार वर्ग में प्रदेश स्तर पर पदक जीतने वाली झांसी की पहली महिला पहलवान बन गई हैं. सीमित संसाधनों और कम समय की तैयारी के बावजूद तमन्ना की यह उपलब्धि संघर्ष, समर्पण और परिवार के अटूट विश्वास की मिसाल बन गई है.

तमन्ना ने जीता कांस्य पदक-
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 7 से 9 फरवरी के बीच आयोजित उत्तर प्रदेश राज्य स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में झांसी की युवा पहलवान तमन्ना समाधिया ने 61 किलोग्राम फ्री-स्टाइल वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया. इस वर्ग में प्रदेशभर से लगभग 50 से 60 महिला पहलवानों ने हिस्सा लिया था. तमन्ना ने संयम और आत्मविश्वास के साथ मुकाबले खेले और तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया.

इससे पहले 2 और 3 फरवरी को ध्यानचंद स्टेडियम के जिम्नास्टिक हॉल में आयोजित जिला कुश्ती प्रतियोगिता में तमन्ना ने स्वर्ण पदक जीतकर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए अपना चयन सुनिश्चित किया था.

झांसी की पहली महिला पहलवान बनीं तमन्ना-
जिला कुश्ती संघ के कोच संदीप सिंह यादव के नेतृत्व में झांसी से 10 खिलाड़ियों का दल वाराणसी रवाना हुआ था. कोच संदीप यादव ने बताया कि तमन्ना को राज्य प्रतियोगिता से पहले मात्र 15 दिनों का विशेष प्रशिक्षण मिल पाया था, इसके बावजूद उसने जो प्रदर्शन किया, वह बेहद सराहनीय है. उन्होंने बताया कि तमन्ना झांसी की पहली महिला पहलवान हैं, जिन्होंने इस भार वर्ग में प्रदेश स्तर पर पदक हासिल किया है.

एक महीने की प्रैक्टिस में जीता मेडल-
हाल ही में यूपी डिस्ट्रिक्ट प्रतियोगिता में भी तमन्ना ने तीसरा स्थान प्राप्त किया था. वह लगभग एक वर्ष से कुश्ती से जुड़ी हैं, हालांकि नियमित अभ्यास उन्होंने करीब एक-सवा महीने पहले ही शुरू किया. पहली बार बड़े स्तर की प्रतियोगिता में मैट पर उतरते समय वह थोड़ी नर्वस जरूर थीं, लेकिन मुकाबले के दौरान आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए उन्होंने पदक सुनिश्चित किया.

देश के लिए खेलने का सपना-
तमन्ना पहले एथलेटिक्स से जुड़ी रही हैं, लेकिन आत्मनिर्भर बनने और खुद को नई पहचान देने के उद्देश्य से उन्होंने कुश्ती को चुना. उनका सपना है कि वह राष्ट्रीय स्तर पर झांसी और देश का प्रतिनिधित्व करें. उन्होंने झांसी में कुश्ती के लिए बेहतर हॉल, मैट और अनुभवी कोच जैसी बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता पर भी जोर दिया.

तमन्ना को मिला फैमिली का साथ-
तमन्ना के पिता सुनील कुमार समाधिया एक किसान हैं. लकारा के रहने वाले सुनील अपनी बेटी की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए खुद उसे लेकर बनारस पहुंचे. उन्होंने बताया कि शुरुआत में बेटी को अकेले भेजने को लेकर असमंजस था, लेकिन उसकी लगन और प्रतिभा को देखते हुए परिवार ने पूरा साथ दिया. कांस्य पदक जीतने के बाद परिवार की खुशी और भावनाएं शब्दों में बयां करना मुश्किल है. सुनील ने कहा कि उनकी बेटी ने न केवल परिवार बल्कि पूरे झांसी का सिर गर्व से ऊंचा किया है.

तमन्ना की मां स्वेता समाधिया ने बताया कि वे बेटा-बेटी में कोई भेदभाव नहीं मानतीं. उनके लिए सबसे अहम अपनी बेटी का सपना है. उन्होंने कहा कि यदि बच्चा किसी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहता है, तो परिवार का कर्तव्य है कि वह हर संभव सहयोग दे. उनका सपना है कि तमन्ना एक दिन चैंपियन बनकर देश का नाम रोशन करे.

कुश्ती संघ ने किया सम्मानित-
राज्य स्तर पर पदक जीतने पर जिला कुश्ती संघ ने तमन्ना और उनके पिता को सम्मानित किया. जिला कुश्ती संघ के अध्यक्ष मनमोहन गेंडा ने कहा कि तमन्ना की सफलता झांसी के लिए गर्व का विषय है. उन्होंने बताया कि जिला कुश्ती संघ नियमित रूप से मासिक बैठकें आयोजित कर अखाड़ों की समस्याओं का समाधान करता है और खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण देने का प्रयास करता है.

(अजय झा की रिपोर्ट)

ये भी पढ़ें: