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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब सिर्फ सवालों के जवाब देने या लिखने तक सीमित नहीं है. इसका इस्तेमाल वैज्ञानिक रिसर्च में भी तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन यही तकनीक अगर खतरनाक वायरस या जहरीले पदार्थों पर गलत तरीके से इस्तेमाल हो, तो बड़ा खतरा पैदा हो सकता है. AI कंपनी Anthropic ने अपनी नई रिपोर्ट में ऐसे ही कुछ मामलों का खुलासा किया है, जिनमें उसके AI मॉडल Claude का इस्तेमाल बेहद संवेदनशील रिसर्च में किया गया.
पांच मामलों ने बढ़ाई चिंता
Anthropic के मुताबिक, कंपनी को ऐसे पांच मामले मिले, जिनमें वैज्ञानिक और रिसर्चर वायरस, जहरीले पदार्थ और दूसरे संवेदनशील जैविक विषयों पर Claude की मदद ले रहे थे. कंपनी ने यह नहीं कहा कि इन लोगों का मकसद जैविक हथियार बनाना ही था. लेकिन रिसर्च की प्रकृति ऐसी थी, जिसका गलत इस्तेमाल होने पर खतरनाक नतीजा निकल सकता है.
कंपनी का कहना है कि जैसे-जैसे AI ज्यादा ताकतवर हो रहा है, वह वैज्ञानिकों को जटिल रिसर्च में भी तेजी से मदद कर सकता है. यही सुविधा सही काम और गलत काम के बीच फर्क करना मुश्किल बना रही है.
चिकनगुनिया वायरस पर क्या हुआ?
सबसे चिंताजनक मामलों में से एक चिकनगुनिया वायरस से जुड़ा था. यह वायरस मच्छरों से फैलता है और तेज बुखार के साथ शरीर के जोड़ों में लंबे समय तक दर्द पैदा कर सकता है.
Anthropic के अनुसार, एक रिसर्च प्रोजेक्ट में वायरस की ऐसी विशेषताओं का अध्ययन किया जा रहा था, जिनसे उसकी फैलने की क्षमता और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता से बच निकलने की क्षमता को समझा जा सके. कंपनी ने AI सिस्टम पर इस अनुरोध को रोक दिया. इस तरह की रिसर्च से भविष्य में वैक्सीन या इलाज विकसित करने में मदद मिल सकती है, लेकिन यही जानकारी वायरस को ज्यादा खतरनाक बनाने में भी काम आ सकती है.
बर्ड फ्लू पर भी AI की मदद ली गई
एक अन्य मामले में वैज्ञानिक बेहद खतरनाक एवियन फ्लू यानी बर्ड फ्लू पर काम कर रहा था. रिसर्च में यह समझने की कोशिश की जा रही थी कि वायरस में होने वाले बदलाव उसे स्तनधारी जानवरों में फैलने या हवा के जरिए संक्रमण फैलाने में कैसे मदद कर सकते हैं.
रिसर्चर ने कई हफ्तों तक Claude की मदद से रिसर्च की योजना बनाने, आंकड़ों को समझने और प्रयोगों के नतीजों का विश्लेषण करने की कोशिश की. हालांकि Anthropic के सुरक्षा सिस्टम ने ज्यादा सक्षम AI मॉडल तक उसकी पहुंच सीमित कर दी. इसलिए उसे मुख्य रूप से सामान्य रिसर्च और योजना बनाने में ही मदद मिल सकी.
छोटे पॉक्स और जहरीले पदार्थों पर भी रिसर्च
एक मामले में ऑर्थोपॉक्स वायरस से जुड़ी रिसर्च के लिए Claude की मदद से पूरी ग्रांट एप्लीकेशन तैयार की गई. इसी परिवार में चेचक यानी स्मॉलपॉक्स और एमपॉक्स जैसे वायरस आते हैं. दो अन्य मामलों में सांप या दूसरे जीवों के जहर से निकलने वाले पदार्थों और कंप्यूटर की मदद से बदले गए जहरीले तत्वों पर काम किया गया. इन रिसर्च का मकसद दवाएं और इलाज विकसित करना बताया गया था, लेकिन ऐसी तकनीक का इस्तेमाल नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थ बनाने में भी हो सकता है.
AI कंपनियों के सामने बड़ी चुनौती
वैज्ञानिक रिसर्च में एक ही जानकारी का इस्तेमाल बीमारी का इलाज बनाने के लिए भी हो सकता है और नुकसान पहुंचाने के लिए भी. AI के लिए सिर्फ यह पहचानना काफी नहीं है कि कोई व्यक्ति क्या सवाल पूछ रहा है. यह समझना भी जरूरी है कि वह व्यक्ति कौन है, रिसर्च किस मकसद से कर रहा है और AI से मिली जानकारी का इस्तेमाल कहां हो सकता है.