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Exclusive: छोटे बच्चों के गेम के जरिए Cyber Fraud को अंजाम दे रहे अपराधी, पेरेंट्स के लिए एक्सपर्ट की ये सलाह है बेहद जरूरी

कैस्परस्काई लैब की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बच्चों की गेम खेलने की लत को जरिया बनाकर साइबर अपराधी पेरेंट्स के डिवाइस तक सेंधमारी कर रहे हैं. इसी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल ऑनलाइन गेम्स के माध्यम से साइबर अपराधियों ने 70 लाख रुपये से ज्यादा की सेंधमारी की. 

साइबर अटैक साइबर अटैक
हाइलाइट्स
  • हम सभी लोग पोटेंशियल साइबर अटैक की गिरफ्त में हैं.

  • बेसिक सावधानियां बरतकर आप डिवाइसेस सुरक्षित रख सकते हैं.

बच्चों में ऑनलाइन गेम खेलने का नशा जितनी तेजी से बढ़ रहा है उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है साइबर अटैक का खतरा. अधिकांश बच्चों के पास मोबाइल नहीं होता और वे गेम खेलने के लिए अपने माता-पिता के फोन का इस्तेमाल करते हैं. कैस्परस्काई लैब की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बच्चों की गेम खेलने की लत को जरिया बनाकर साइबर अपराधी पेरेंट्स के डिवाइस तक सेंधमारी कर रहे हैं. इसी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल ऑनलाइन गेम्स के माध्यम से साइबर अपराधियों ने 70 लाख रुपये से ज्यादा की सेंधमारी की. साइबर सिक्योरिटी के लिए भारतीय बैंकिंग, फाइनांस, इंश्योरेंस और IT कंपनियां हर साल करोड़ों रुपए खर्च करती हैं बावजूद इसके साइबर अटैक की घटनाओं में कमी नहीं आई है.

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बच्चों का ऑनलाइन गेम खेलना कितना जोखिम भरा हो सकता है. गेम के जरिए होने वाले साइबर हमले में पिछले एक साल में 57 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है. वहीं पिछले 5 सालों में 200 प्रतिशत ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाएं बढ़ी हैं. इस मामले में GNT Digital ने जाने माने साइबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल से बातचीत की. 


सवाल: लोग अपने डिवाइस को साइबर अटैक से कैसे सुरक्षित रख सकते हैं? खासकर पैरेंट्स जो अपने बच्चों को गेम खेलने के लिए फ़ोन देते हैं?

जवाब: आज हम सभी लोग पोटेंशियल साइबर अटैक की गिरफ्त में हैं. साइबर क्राइम का गोल्डन एज शुरू हो चुका है. आज साइबर क्रिमिनल्स आपके बारे में पहले अच्छी रिसर्च करते हैं और तब सेंधमारी करते हैं. आज के डिजिटल युग में डिवाइसेस को आप पूरी तरह से साइबर सिक्योर नहीं बना सकते हैं. जो चीज कल तक सुरक्षित थी, वो आज सुरक्षित नहीं है और जो आज सुरक्षित हैं वो कल सुरक्षित नहीं होने वाली. आप साइबर सुरक्षा को जीवन जीने की शैली के रूप में जरूर अडॉप्ट कर सकते हैं.

सवाल: साइबर अटैक से बचने के लिए टिप्स

बेसिक सावधानियां बरतकर आप डिवाइसेस सुरक्षित रख सकते हैं. खासतौर पर जब आप एक माता-पिता हैं और अपना डिवाइस बच्चों को दे रहे हैं. पहली बात ये कि अपने डिवाइस पर कोई भी सेंसिटिव डेटा न रखें. फोन पर इंटरनेट बैंकिंग ट्रांजेक्शन बिल्कुल बंद कर देनी चाहिए. इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से आपको टारगेट किया जा सकता है. इसलिए केवल अधिकृत एप्स से ही ट्रांजेक्शन करें. ऐसा नहीं है कि आपके फोन से पैसा चुराया जाता है. आपके फोन से केवल डेटा चुराया जाता है और क्राइम को अंजाम दिया जाता है. इंटरनेट के माध्यम से अगर आप ट्रांजेक्शन कर रहे हैं तो फोन पर अपना कोई यूजरनेम और पासवर्ड सेव करके न रखें. इंटरनेट बैंकिंग में लिमिट्स हमेशा छोटी रखें. ताकि नुकसान की संभावना भी छोटी हो. इसके अलावा आपको अपने फोन पर स्पैम अलर्ट रखना चाहिए. आप एंटी वायरस भी इंस्टॉल कर सकते हैं जो आपके डेटा को चोरी होने से रोक सके. कभी भी कोई असामान्य फिशिंग पेज नजर आए तो उसपर क्लिक करने से बचें. आपके फोन या दूसरे डिवाइस पर जो मैसेज आते हैं, उन्हें ओपन करने से पहले समझदारी दिखाएं. इस तरह कुछ सावधानियों को बरतकर आप साइबर अटैक से कुछ हद तक बच सकते हैं. 

साइबर अटैक


सवाल: अगर कभी आपके साथ साइबर अटैक जैसी घटना हो तो सबसे पहले क्या करें?
सबसे पहले आपको रिपोर्ट करना जरूरी है. राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर पर, साइबर क्राइम की हेल्पलाइन वेबसाइट (cybercrime.gov.in) है आप वहां रिपोर्ट कर सकते हैं. साइबर फ्रॉड होने के 60 मिनट से कम समय में 1930 पर कॉल किया जा सकता है. इसके अलावा आप लोकल थाने में भी रिपोर्ट कर सकते हैं. अगर अकाउंट के साथ किसी तरह का साइबर क्राइम हुआ है तो उस बैंक को भी लिखित में शिकायत जरूर दें. 72 घंटे के अंदर आपको अपने साथ हुए साइबर क्राइम की जानकारी बैंक को लिखित में देनी चाहिए. अगर आप ऐसा करते हैं तो आरबीआई की गाइडलाइन के अनुसार आपका गया हुआ पैसा वापस मिलता है.

सवाल: क्या बच्चों को भी साइबर अटैक से सर्तक करने का समय आ गया है?
आज के समय में बच्चों को साइबर लॉ और साइबर सुरक्षा की शिक्षा स्कूलों में देनी शुरू कर देनी चाहिए क्योंकि आजकल बहुत छोटी उम्र में ही बच्चों को डिवाइस दिए जा रहे हैं. उन्हें ट्रांजेक्शन करने की सुविधा दी जा रही है. इसलिए आप जितना बच्चों को सतर्क बनाएंगे उतने ही सुरक्षित रहेंगे. इस बात को बच्चों से लेकर बड़े और बुजुर्गों तक, सभी को समझना होगा. 2022 में साइबर क्रिमिनल्स ने ऐसे गेम के जरिए लोगों को ठगा जो कि 3 से 8 साल तक तक की उम्र के बच्चों के लिए बनाए गए थे. साइबर अपराधियों ने पैरेंट्स के डिवाइस में सेंध लगाने के लिए फर्जी गेम साइट तक बनाई है. 

फिशिंग यूआरएल भी फ्रॉड का चर्चित तरीका
फिशिंग यूआरएल  (URL Phishing) एक तरह का फ्रॉड लिंक होता है, जिसकी मदद से आपकी निजी जानकारी मांगी जाती है. फिशिंग यूआरएल पर क्लिक करते ही आप फेक वेब पर पहुंच जाते हैं. अगर आप इसमें अपनी जानकारी भर देते हैं तो यह हैकर के सर्वर में सेव हो जाती है. वह जब चाहे आपकी  का इस्तेमाल फ्रॉड करने के लिए कर सकता है.

इन गेमों के जरिए हो रही ठगी
अपराधियों ने रॉबलॉक्स, माइनक्राफ्ट, फोर्टनाइट और एपेक्स जैसे गेम के माध्यम से आसानी से निशाना बनाया है. बच्चों के लोकप्रिय गेम प्लेटफॉर्म रॉबलॉक्स के जरिए 40 हजार यूजर्स ने धोखे से संदिग्ध फाइलों को डाउनलोड करने का प्रयास किया और इसलिए साइबर अपराधियों का शिकार होने वालों की संख्या में 14 प्रतिशत बढ़ोतरी हो गई. रॉबलॉक्स यूजर में से आधे से ज्यादा बच्चे हैं जिन्हें साइबर सुरक्षा का कई ज्ञान नहीं होता.