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कई इंटरनेट यूजर्स कभी न कभी Incognito Mode का इस्तेमाल करते हैं. कई लोगों को लगता है कि इस मोड में इंटरनेट इस्तेमाल करने से उनकी पूरी ऑनलाइन एक्टिविटी छिप जाती है, और कोई भी उनकी ब्राउजिंग हिस्ट्री नहीं देख सकता. लेकिन सवाल होता है कि क्या वाकई ऐसा सच है या नहीं?
गूगल क्रोम में इसे इंकोगनिटो मोड कहा जाता है. वहीं फायरफॉक्स में प्राइवेट ब्राॉजिंग और सफारी में प्राइवेट विंडो के नाम से जाना जाता है. जब आप इस मोड में इंटरनेट चलाते हैं तो ब्राउजर आपकी ब्राउजिंग हिस्ट्री, कुकीज और सर्च की जानकारी को नॉर्मल तरीके से सेव नहीं करता. इस विंडो के बंद करने के बाद उसी डिवाइस पर आपकी देखी गई वेबसाइटों की हिस्ट्री आमतौर पर दिखाई नहीं देती.
इंकोगनिटो मोड सिर्फ आपके डिवाइस पर लोकल हिस्ट्री को छिपाने में मदद करता है. इंटरनेट पर आपकी पहचान और एक्टिविटी पूरी तरह छिप नहीं जाती. यानी अगर आपको लगता है कि इंकोगनिटो खोलने के बाद आप इंटरनेट पर पूरी तरह छिप सकते हैं, तो ऐसा नहीं है.
आपका इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर यानी जिस कंपनी से आपको इंटरनेट मिलता है, वह आपकी ऑनलाइन एक्टिविटी देख सकती है. इंकोगनिटो मोड इस जानकारी को इंटरनेट कंपनी से छिपाने का काम नहीं करता. इसलिए इसे पूरी तरह प्राइवेसी टूल समझना सही नहीं है.
अगर आप ऑफिस, स्कूल या किसी किसी Wi-Fi का इस्तेमाल कर रहे हैं तो वहां का नेटवर्क एडमिन आपकी ऑनलाइन एक्टिविटी देख सकता है. इसलिए पब्लिक या ऑफिस नेटवर्क पर इंकोगनिटो मोड का इस्तेमाल करने का मतलब यह नहीं है कि आपकी एक्टिविटी सभी से छिप गई.
जिस वेबसाइट को आप इंकोगनिटो मोड में खोलते हैं, वह भी आपकी कुछ जानकारी देख सकती है. इसमें आपका IP Address और लोकेशन जैसी जानकारी शामिल हो सकती है. इसलिए इंकोगनिटो मोड आपको वेबसाइटों से पूरी तरह छिपा नहीं देता.