Digital Arrest
Digital Arrest
आजकल हम सब डिजिटल तो हो गए हैं, लेकिन इसी डिजिटल दुनिया में ठगी का एक नया और डरावना तरीका चल पड़ा है- 'डिजिटल अरेस्ट'. शातिर ठगों से बचाना है तो आपको खुद सतर्क रहना पड़ेगा.
ऐसे शिकार बनते हैं लोग-
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के डायरेक्टर निशांत कुमार ने बताया कि ठग सबसे पहले आपको फोन करके डराते हैं. वे खुद को CBI, पुलिस या कस्टम अधिकारी बताते हैं और कहते हैं कि आपके नाम पर कोई गैरकानूनी पार्सल आया है या आप किसी केस में फंस गए हैं. फिर वे आपको 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी देते हैं और डरा-धमका कर अपने खाते में पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं. दिल्ली लिटरेचर फेस्टिवल में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान उन्होंने लोगों को सतर्क किया.
निशांत कुमार ने बड़े काम की बात कही- याद रखिए, कोई भी असली पुलिसवाला कभी भी वीडियो कॉल या फोन पर किसी को गिरफ्तार नहीं करता और न ही केस रफा-दफा करने के लिए पैसे मांगता है. अगर कोई ऐसा कर रहा है, तो समझ लीजिए कि सामने वाला पक्का अपराधी है.
क्यों फंस जाते हैं लोग?
अक्सर हमें लगता है कि सिर्फ कम पढ़े-लिखे लोग ही ठगे जाते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके उलट, बड़े-बड़े प्रोफेशनल और अधिकारी इन ठगों का शिकार बन रहे हैं. अपराधी आपकी 'इज्जत' और 'बदनामी के डर' का फायदा उठाते हैं. वे आपको सोचने का मौका ही नहीं देते और जल्दबाजी में आपसे गलत कदम उठवा लेते हैं.
सरकार की क्या है तैयारी?
केंद्र सरकार ने साल 2019 में ही 'इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर' (I4C) की स्थापना की थी, ताकि पूरे देश की पुलिस और बैंक मिलकर इन ठगों पर लगाम लगा सकें. निशांत कुमार ने कहा कि डिजिटल इंडिया हमारी शान है, लेकिन इसके साथ-साथ हमें अपनी समझदारी भी बढ़ानी होगी. उन्होंने सलाह दी कि साइबर सुरक्षा की जानकारी के लिए लोग 'Cyber Dost' के सोशल मीडिया पेज को जरूर फॉलो करें. अगर आपके या आपके किसी जानने वाले के साथ ऐसा कुछ होता है, तो घबराएं नहीं तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें.
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