Digital Camouflage
Digital Camouflage
सोचिए, आप सड़क पर चल रहे हों और वहां लगे AI कैमरे आपको पहचानने की कोशिश करें, लेकिन आपकी शर्ट की वजह से कैमरा यह तय ही न कर पाए कि सामने कोई इंसान खड़ा है. सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन जर्मन डिजाइनर साइमन वेकर्ट ने ऐसी ही एक अनोखी शर्ट तैयार की है. इसका नाम Digital Camouflage है. रंग-बिरंगे पैटर्न वाली यह शर्ट AI बेस्ड कैमरों के लिए इंसान को पहचानना मुश्किल बनाने के मकसद से डिजाइन की गई है.
दूर से देखने पर सामान्य AI के लिए उलझन
पहली नजर में Digital Camouflage शर्ट किसी आधुनिक डिजाइन वाली रंगीन शर्ट जैसी दिखाई देती है. इस पर हरे, गुलाबी और नारंगी रंगों के अलग-अलग आकार बने हैं. लेकिन इन रंगों और आकृतियों का मकसद सिर्फ शर्ट को आकर्षक बनाना नहीं है. जब कोई व्यक्ति सामान्य कपड़े में कैमरे के सामने खड़ा होता है तो AI सिस्टम उसके चारों तरफ हरे रंग का बॉक्स बनाकर उसे PERSON यानी इंसान के रूप में पहचान लेता है. लेकिन जैसे ही यह खास शर्ट शरीर के सामने आती है, AI की पहचान कमजोर पड़ जाती है और बॉक्स गायब हो जाता है. शर्ट हटाते ही सिस्टम दोबारा व्यक्ति को पहचान लेता है.
आखिर AI इंसान को पहचानता कैसे है?
इंसान किसी दूसरे इंसान को देखकर तुरंत समझ सकता है कि सामने व्यक्ति है. AI कैमरा ऐसा नहीं करता. वह तस्वीरों और वीडियो से सीखे हुए पैटर्न के आधार पर अनुमान लगाता है. कैमरा शरीर का आकार, किनारे, रंग, बनावट और दूसरे विजुअल संकेतों को देखकर तय करता है कि सामने इंसान है या कोई दूसरी वस्तु. यानी AI के लिए किसी व्यक्ति की पहचान कई छोटे-छोटे संकेतों को जोड़कर होती है. Digital Camouflage इसी प्रक्रिया में गड़बड़ी पैदा करने की कोशिश करती है.
रंग और पैटर्न कैसे देते हैं AI को धोखा?
शर्ट पर बने चमकीले रंग और एक-दूसरे से मिलते-जुलते आकार AI के लिए दिखाई देने वाले विजुअल संकेतों को बिगाड़ देते हैं. रंग कैमरे का ध्यान अलग-अलग हिस्सों की तरफ खींचते हैं, जबकि पैटर्न शरीर की वास्तविक आउटलाइन को तोड़ देते हैं.
AI की मदद से ही तैयार किया गया डिजाइन
इस शर्ट की खास बात यह भी है कि इसका डिजाइन केवल अंदाजे से नहीं बनाया गया. वेकर्ट ने इसे तैयार करने के लिए AI की मदद ली. उन्होंने इसे एक Adversarial loop बताया है. इस प्रक्रिया में एक पैटर्न तैयार किया जाता है और फिर उसे AI डिटेक्शन सिस्टम के सामने टेस्ट किया जाता है. देखा जाता है कि सिस्टम व्यक्ति को कितनी आसानी से पहचान पा रहा है. इसके बाद पैटर्न में बदलाव किया जाता है और फिर से टेस्ट किया जाता है.
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